Skip to content

The Xpress News

  • Home
  • धर्म अध्यात्म
  • Health
  • Blog
  • Toggle search form
  • स्मार्ट इंडिया हैकथान
    स्मार्ट इंडिया हैकथान में युवा प्रतिभाओं ने दिखाया दम Education
  • गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई को : कौन हो सकता है गुरु, जाने pt. हृदयरंज शर्मा जाने से धर्म अध्यात्म
  • Railway Sports
    Railway Sports : वालीबाल प्रतियोगिता में यंत्रालय की टीम ने परिचालन विभाग को 25-17 एवं 25-9 अंको से हराया Railway
  • शरत सुधाकर चंद्रायन
    श्री शरत सुधाकर चंद्रायन ने प्रधान मुख्य परिचालन प्रबंधक उत्तर मध्य रेलवे का किया पदभार ग्रहण Railway
  • Railway
    Railway : कीमैन विपिन कुमार का कर्मठता और सतर्कता के लिए सम्मान Railway
  • बेटी को निखारने में मां ‘यशोदा’ हिमानी की ‘भूमिका ‘ Education
  • गणतंत्र दिवस
    गणतंत्र दिवस को भव्य तरीके से मनाने के लिए योगी सरकार ने शुरू की तैयारी Blog
  • समाजवादी पार्टी की टोपी लाल, कारनामे काले: सीएम योगी UP Government News
Hartalika Teej

Hartalika Teej 2024 : हरतालिका तीज की व्रत विधि, मंत्र, मुहूत और पूजन सामग्री

Posted on September 5, 2024 By Manish Srivastava No Comments on Hartalika Teej 2024 : हरतालिका तीज की व्रत विधि, मंत्र, मुहूत और पूजन सामग्री

अलीगढ़ (Aligarh) : हरतालिका तीज (Hartalika Teej) (गौरी तृतीया)  व्रत 6 सितंबर दिन शुक्रवार को है। ये व्रत हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा व्रत माना जाता हैं। इसे भाद्रपद मास शुक्ल की तृतीया तिथि को मनाया जाता हैं। श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार वाले प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पं. हृदय रंजन शर्मा से विस्तार से जानें वृत के महत्व को।

पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि हरतालिका तीज अगस्त-सितंबर महीने में आती है। इसे गौरी तृतीया व्रत भी कहते है। भगवान शिव और पार्वती को समर्पित है। मुख्य रूप से महिलाएं इस त्योहार को मनाती है। लेकिन छोटी उम्र की लड़कियों के लिए भी हरतालिका का व्रत श्रेष्ठ माना जाता है।

विधि-विधान से हरितालिका तीज का व्रत करने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। विवाहित महिलाओं को इस व्रत से अखंड सौभाग्य मिलता है। हरतालिका तीज में भगवान शिव, माता गौरी और गणेश जी की पूजा की जाती है। शिव जैसा पति पाने के लिए कुंवारी कन्या इस व्रत को विधि-विधान से करती हैं। यह व्रत निराहार एवं निर्जला किया जाता हैं।

Hartalika Teej
Hartalika Teej

हरतालिका तीज (Hartalika Teej) की व्रत विधि और नियम
हरतालिका पूजन प्रदोष काल में किया जाता हैं। प्रदोष काल अर्थात दिन और रात के मिलने का समय। सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त को प्रदोषकाल कहा जाता है। हरतालिका पूजन के लिए शिव, पार्वती, गणेश एव रिद्धि-सिद्धि जी की प्रतिमा बालू रेत अथवा काली मिट्टी से बनाई जाती हैं।

विविध पुष्पों से सजाकर उसके भीतर रंगोली डालकर उस पर चैकी रखी जाती हैं। चैकी पर एक अष्टदल बनाकर उस पर थाल रखते हैं। उस थाल में केले के पत्ते को रखते हैं। सभी प्रतिमाओ को केले के पत्ते पर रखा जाता हैं। सबसे पहले शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके बाद दाहिने हाथ में अक्षत रोली बेलपत्र, मूंग, फूल और पानी लेकर इस मंत्र से संकल्प करें –

“उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रत महं करिष्ये।”

इसके बाद कलश के ऊपर नारियल रखकर लाल कलावा बाँध कर पूजन किया जाता हैं। कुमकुम, हल्दी, चावल, पुष्प चढ़ाकर विधिवत पूजन होता हैं। कलश के बाद गणेश जी की पूजा की जाती हैं।

इसके बाद शिव जी की पूजा जी जाती हैं। तत्पश्चात माता गौरी की पूजा की जाती हैं। उन्हें सम्पूर्ण श्रृंगार चढ़ाया जाता हैं। इसके बाद अन्य देवताओं का आह्वान कर षोडशोपचार पूजन किया जाता है।

इसके बाद हरतालिका व्रत की कथा पढ़ी जाती हैं। इसके पश्चात आरती की जाती हैं जिसमे सर्वप्रथम गणेश जी की पुनः शिव जी की फिर माता गौरी की आरती की जाती हैं। इस दिन महिलाएं रात्रि जागरण भी करती हैं और कथा-पूजन के साथ कीर्तन करती हैं। प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव को सभी प्रकार की वनस्पतियां जैसे बिल्व-पत्र, आम के पत्ते, चंपक के पत्ते एवं केवड़ा अर्पण किया जाता है। आरती और स्तोत्र द्वारा आराधना की जाती है। हरतालिका व्रत का नियम हैं कि इसे एक बार प्रारंभ करने के बाद छोड़ा नहीं जा सकता।

प्रातः अन्तिम पूजा के बाद माता गौरी को जो सिंदूर चढ़ाया जाता हैं उस सिंदूर से सुहागन स्त्री सुहाग लेती हैं। ककड़ी एवं हलवे का भोग लगाया जाता हैं। उसी ककड़ी को खाकर उपवास तोडा जाता हैं। अंत में सभी सामग्री को एकत्र कर पवित्र नदी एवं कुण्ड में विसर्जित किया जाता हैं।




भगवती-उमा की पूजा के लिए ये मंत्र बोलना चाहिए

ऊं उमायै नमरू
ऊं पार्वत्यै नमरू
ऊं जगद्धात्र्यै नमरू
ऊं जगत्प्रतिष्ठयै नमरू
ऊं शांतिरूपिण्यै नमरू
ऊं शिवायै नमरू

भगवान शिव की आराधना इन मंत्रों से करनी चाहिए

ऊं हराय नमरू
ऊं महेश्वराय नमरू
ऊं शम्भवे नमरू
ऊं शूलपाणये नमरू
ऊं पिनाकवृषे नमरू
ऊं शिवाय नमरू
ऊं पशुपतये नमरू
ऊं महादेवाय नमरू

🍁निम्न नामो का उच्चारण कर बाद में पंचोपचार या सामर्थ्य हो तो षोडशोपचार विधि से पूजन किया जाता है। पूजा दूसरे दिन सुबह समाप्त होती है, तब महिलाएं द्वारा अपना व्रत तोडा जाता है और अन्न ग्रहण किया जाता है।

💥हरितालका तीज पूजा मुहूर्त
हरितालिका पूजन प्रातःकाल ना करके प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त में किया जाना ही शास्त्रसम्मत है।
प्रदोषकाल निकालने के लिये आपके स्थानीय सूर्यास्त में आगे के 96 मिनट जोड़ दें तो यह एक घंटे 36 मिनट के लगभग का समय प्रदोष काल माना जाता है।
प्रदोष काल मुहूर्त रू को सायं 06:29 से 08:05 तक

पारण अगले दिन 7 सितम्बर को प्रातः काल 6 बजकर 05 मिनट के बाद करना उत्तम रहेगा।

हरतालिका व्रत पूजन की सामग्री

1- फुलेरा विशेष प्रकार से फूलों से सजा होता है।
2- गीली काली मिट्टी अथवा बालू रेत।
3- केले का पत्ता।
4- विविध प्रकार के फल एवं फूल पत्ते।
5- बेल पत्र, शमी पत्र, धतूरे का फल एवं फूल, तुलसी मंजरी।
6- जनेऊ , नाडा, वस्त्र,।
7- माता गौरी के लिए पूरा सुहाग का सामग्री, जिसमे चूड़ी, बिछिया, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, महावर, मेहँदी आदि एकत्र की जाती हैं। इसके अलावा बाजारों में सुहाग पूड़ा मिलता हैं जिसमे सभी सामग्री होती हैं।
8- घी, तेल, दीपक, कपूर, कुमकुम, सिंदूर, अबीर, चन्दन, नारियल, कलश।
9- पञ्चामृत – घी, दही, शक्कर, दूध, शहद।




प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पं.हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी व्हाट्सएप नंबर-9756402981,7500048250

धर्म अध्यात्म Tags:Aligarh news, Hartalika Teej, Pt Hriday Ranjan Sharma, हरतालिका तीज

Post navigation

Previous Post: Sports Week Ends : क्रीडा भारती खेल सप्ताह का खेल प्रशिक्षकों के सम्मान के साथ समापन
Next Post: Hartalika Teej 2024 : हरतालिका तीज की व्रत कथा

Related Posts

  • Hariyali Teej
    Hariyali Teej 2025 : हरियाली तीज 27 को, जानें इस त्योहार में क्या होता है खास धर्म अध्यात्म
  • शैलपुत्री
    फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा दिन सोमवार 2 मार्च को धर्म अध्यात्म
  • ब्रह्मचारिणी
    Pitru Paksh 2023 : तर्पण के लिए सर्वोत्तम तिथियॉ हैं 3, 7 और 14 अक्टूबर : पं. ह्रदयरंजन शर्मा धर्म अध्यात्म
  • Skandamata Fifth Day
    Raksha Bandhan Muhurta : जानें रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त व विशेष उपाय धर्म अध्यात्म
  • Skandamata Fifth Day
    28 अप्रैल से सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों पर लगी सवा दो महीने तक रोक धर्म अध्यात्म
  • ब्रह्मचारिणी
    श्रीगणेश उत्सव 19 से 28 सितंबर तक, अपनी राशि अनुसार करें आराधना, मिलेगी हर कार्य में सफलता धर्म अध्यात्म

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • नोएडा की अग्रिमा सिंह अंडर 15 व 17 दोनों वर्गों के फाइनल में प्रवेश किया Sports
  • Dhanteras : अपनी राशियों के अनुसार जाने धनतेरस पर करें खरीदारी, Know what to shop on Dhanteras according to your zodiac sign Festival
  • खूबसूरती और टैलेंट का दूसरा नाम है डॉ. रोशनी टाक मनोरंजन
  • Ayodhya
    Sri Ramlala Darshan : श्रद्धालुओं को हो रहे श्रीरामलला के सुगम दर्शन धर्म अध्यात्म
  • Ashtami Fast
    Shri Hanuman Janmotsav : बजरंगबली के किस उपाय से मिलता है क्या लाभ, जानें विस्तार से धर्म अध्यात्म
  • कानपुर के अभिषेक सिंह और शिवम को UTT पैरा राष्ट्रीय टेबल टेनिस में कांस्य पदक Sports
  • Kharmas
    Kharmas 16 December : खरमास 16 दिसंबर से 14 जनवरी तक रहेगा, क्‍यों निषेध रहते हैं मांगलि‍क कार्य, जानें पं हृदय रंजन शर्मा जी से धर्म अध्यात्म
  • Alankara Samaroh
    Alankara Samaroh : जय नारायण विद्या मन्दिर इंटर में प्रतिभा अलंकरण समारोह सम्पन्न धर्म अध्यात्म

Copyright © 2026 .

Powered by PressBook News WordPress theme