Skip to content

The Xpress News

  • Home
  • धर्म अध्यात्म
  • Health
  • Blog
  • Toggle search form
  • Mahaakumbh-2025 : बदल रहा है महाकुंभ में जन-आस्था के सबसे बड़े आकर्षण अखाड़ों का स्वरूप Blog
  • Writer Rohit Rana
    Writer Rohit Rana : मेरठ के रोहित राणा की कलम से अब बनेंगी बाॅलीवुड की फिल्में मनोरंजन
  • जेएमडी वर्ल्ड स्कूल
    राज्यस्तरीय बैडमिंटन व तैराकी प्रतियोगिता के लिए शहर की टीम चयनित Sports
  • Multiple Talents
    Multiple Talents : चर्चित हस्तियों में शुमार हैं जम्मू की मल्टीपल टैलेंटड अमर चौहान Education
  • गाय-भैंस खरीदने से पहले लोग प्रियंका की लेते हैं राय Motivation
  • बैडमिंटन चैम्पियनशिप
    सीएसजेएमयू बैडमिंटन टीम में कानपुर के 5 खिलाड़ी चयनित, Five players from Kanpur selected in CSJMU badminton team Sports
  • Malaysian Open
    Malaysian Open : सिंधु मलेशिया ओपन के सेमीफाइनल में, सात्विक और चिराग हारे Sports
  • Famous songs of Karva Chauth
    अतिदुर्लभ रवि_पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग मे माघ पूर्णिमा आज धर्म अध्यात्म
Famous songs of Karva Chauth

Raksha Bandhan 2025 : रक्षा बंधन और भाई दूज में क्‍या है अंतर, जानें प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन जी से

Posted on July 30, 2025July 30, 2025 By Manish Srivastava No Comments on Raksha Bandhan 2025 : रक्षा बंधन और भाई दूज में क्‍या है अंतर, जानें प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन जी से

Kanpur : रक्षाबंधन 09 अगस्त  दिन शनिवार को है। रक्षा बंधन और भाई दूज में अंतर है। तो आइए आज आपको इस विषय पर विस्तृत जानकारी दे रहे हैं श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भण्डार वाले प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा जी।

भाई दूज का त्योहार आज देश के कई हिस्सों में मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई का तिलक करती हैं। उसका स्वागत सत्कार करती हैं और उनके लम्बी उम्र की कामना करतीं हैं। भाई दूज के दिन भाई के माथे पर तिलक लगाने की प्रथा के बारे में तो सब जानते हैं, इस त्योहार में कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। भाई दूज का पवित्र त्योहार स्नेह और सम्मान का पर्व है. इसलिए घर के जिस भी सदस्य के प्रति आपका स्नेह ज्यादा है उनके माथे पर भी आप चंदन का टीका लगा सकती हैं। जैसे कि कई परिवारों में भाई के साथ-साथ भतीजे के माथे पर भी टीका करने का रिवाज होता है। भाई और भतीजे के अतिरिक्त महिलाएं घर के सबसे छोटे सदस्यों को भी टीका लगा सकती हैं। आप चाहें तो भाई के किसी प्रिय मित्र को भी भाई दूज पर तिलक लगा सकती हैं। इस दिन कई जगहों पर तो भगवान गणेश के माथे पर भी तिलक लगाया जाता है। ऐसा करके महिलाएं उनसे सुख-समृद्धि का वरदान पाती हैं। गणेश को तिलक लगाने के बाद भाई की तरह ही नारियल और मिष्ठान अर्पित किए जाते हैं।




यह पर्व नहीं बल्‍कि एक ऐसी भावना है जो रेशम की कच्‍ची डोरी के द्वारा भाई-बहन के प्‍यार को हमेशा-हमेशा के लिए संजोकर रखती है. रक्षा बंधन का त्‍योहार हिन्‍दू धर्म के बड़े त्‍योहारों में से एक है, जिसे देश भर में धूमधाम और पूरे हर्षोल्‍लास के साथ मनाया जाता है। यह त्‍योहार भाई-बहन के अटूट रिश्‍ते, प्यार‍, त्याग और समर्पण को दर्शाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी या रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी आयु और मंगल कामना करती हैं। वहीं, भाई अपनी प्यारी‍ बहन को बदले में भेंट या उपहार देकर हमेशा उसकी रक्षा करने का वचन देते हैं। यह इस बहन को बदले में भेंट या उपहार देकर हमेशा उसकी रक्षा करने का वचन देते हैं. यह इस त्योहार की विशेषता है कि न सिर्फ हिन्‍दू बल्‍कि अन्‍य धर्म के लोग भी पूरे जोश के साथ इस त्‍योहार को मनाते हैं।

भाई दूज और रक्षा बंधन का त्योहार दोनों ही भाई बहन के रिश्तों से जुड़ा हुआ त्योहार है। रक्षा बंधन जहां हिन्दू माह श्रावण माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है वहीं भाई दूज कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है। भाई दूज दीपावली के पांच दिनी महोत्सव का अंतिम दिन होता है।




🍁रक्षा बंधन और भाई दूज में प्रमुख अंतर
~~~~~~~
1. भाई दूज का त्योहार यमराज के कारण हुआ था, इसीलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं, जबकि रक्षा बंधन का प्रारंभ जहां राजा बली, इंद्र और भगवान श्रीकृष्ण के कारण हुआ था वहीं ।

2. रक्षा बंधन के दिन बहनों का विशेष महत्व होता है। रक्षा बंधन में भाई के घर जा कर बहने राखी बांधतीं हैं और भाई उन्हें उपहार देता है जबकि भाई दूज के दिन भाई बहनों के घर जा कर टिका कराता है और बहनें, उसे तिलक लगाकर उसकी आरती उतारकर उसे भोजन खिलाती है।

3. रक्षा बंधन को संस्कृत में रक्षिका या रक्षा सूत्र बंधन कहते हैं जबकि भाई दूज को संस्कृत में भागिनी हस्ता भोजना कहते हैं।

4. रक्षा बंधन ‘रक्षा सूत्र’ मौली या कलावा बांधने की परंपरा का ही एक रूप है आधुनिक युग में विभिन्न तरह की राखियाँ आ गयी है जिनसे इस पर्व की परम्परा को निभाया जाता है, जबकि भाई दूज में ऐसा नहीं है। भाई दूज किसी अन्य परंपरा से निकला त्योहार नहीं है, बल्कि यम द्वारा यमुना को दिए गए आशीर्वाद और वचन के फलस्वरूप इस पर्व को मनाया जाता है।

5. रक्षा बंधन को राखी का त्योहार भी कहते हैं और प्राय: इसे दक्षिण भारत में नारियल पूर्णिमा के नाम से अलग रूप में मनाया जाता है जबकि भाई दूज के अन्य प्रांत में नाम अलग अलग है लेकिन यह त्योहार भाई और बहन से ही जुड़ा हुआ है। इसे सौदरा बिदिगे (कर्नाटक), भाई फोटा (बंगाल) में भाई दूज को इस अन्य नाम से जाना जाता है। महाराष्ट्र में भाऊ बीज, गुजरात में भौ या भै-बीज कहते हैं तो अधिकतर प्रांतों में भाई दूज। भारत के बाहर नेपाल में इसे भाई टीका कहते हैं। मिथिला में इसे यम द्वितीया के नाम से ही मनाया जाता है।

6. रक्षा बंधन पर महाराजा बली की कथा सुनने का प्रचलन है जबकि भाईदूज पर यम और यमुना की कथा सुनने का प्रचलन है।रक्षा बंधन पर बहनें अपने भाई को राखी बांधती हैं जबकि भाई दूज पर सिर्फ तिलक लगाया जाता है।

7. रक्षा बंधन पर मिष्ठान खिलाने का प्रथा है जबकि भाई दूज पर भाई को भोजन के बाद पान खिलाने का प्रथा है। मान्यता है कि पान भेंट करने से बहने अखण्ड सौभाग्यवती रहती है।

8. भाई दूज पर जो भाई-बहन यमुनाजी में स्नान करते हैं, उनको यमराजजी यमलोक की प्रताड़ना नहीं देते हैं। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन यमुना का पूजन किया जाता है जबकि रक्षा बंधन पर ऐसा नहीं होता है।

9. भाई दूज सर्व प्रचलित त्योहार है जो संपूर्ण भारत में मनाया जाता है जबकि रक्षा बंधन कुछ प्रांतों में ही प्रचलित है क्योंकि कुछ प्रांतों श्रावण पूर्णिमा को भाई-बहन से जोड़कर नहीं मनाया जाता




🌞प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा- अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भण्डार वाले पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी वाट्सएप नंबर- 9756402981,7500048250

धर्म अध्यात्म

Post navigation

Previous Post: Tulsi Jayanti Festival : जयनारायण विद्या मंदिर में धूमधाम से मना तुलसी जयंती महोत्सव, देखें वीडियो
Next Post: कानपुर के खिलाड़ियों का दबदबा : बरेली यूपी स्टेट रैंकिंग टेबल टेनिस में 2 स्वर्ण, 2 रजत और 3 कांस्य पदक

Related Posts

  • Worship of Shailputri
    Worship of Shailputri : माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप श्री शैलपुत्री जी की पूजा विधि, कथा, कलश स्‍थापना और आरती धर्म अध्यात्म
  • कानपुर
    कानपुर को अयोध्या और चित्रकूट की श्रेणी में स्थापित करने पर हुआ मंथन धर्म अध्यात्म
  • Pancham Skandamata
    Pancham Skandamata : पंचम स्कंदमाता.19 अक्टूबर 2023 दिन गुरुवार धर्म अध्यात्म
  • Durga Ashtami
    Importance of the month of Vaishakh : वैशाख में तीर्थ में स्नान करने, पितरों को तर्पण करने और जल का दान करने का है विशेष महत्व धर्म अध्यात्म
  • ब्रह्मचारिणी
    Shri Ganesh-lakshmi worship : माता लक्ष्मी को मनाने के लिए करें ये उपाय धर्म अध्यात्म
  • Durga Navami
    Makar Sankranti 2026 : मकर संक्रांति पर सभी 12 राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा धर्म अध्यात्म

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Hartalika Teej
    Hartalika Teej 2024 : हरतालिका तीज की व्रत विधि, मंत्र, मुहूत और पूजन सामग्री धर्म अध्यात्म
  • VSSD College Sports
    VSSD College Sports : वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता में पहले दिन कीर्ति यादव का जलवा Sports
  • Tulsi Jayanti Festival
    Tulsi Jayanti Festival : जयनारायण विद्या मंदिर में धूमधाम से मना तुलसी जयंती महोत्सव, देखें वीडियो Education
  • कर्क राशि
    वृषभ राशि वालों के लिए कैसा रहेगा नया साल, जाने डॉ. रोशनी टाक से धर्म अध्यात्म
  • भड्डली नवमी
    Holi Stories : होलिका का त्योहार क्या है, जानें इसकी पौराणिक कथाएं या मान्यताएं धर्म अध्यात्म
  • Important Health Tips
    Important Health Tips : स्टार फिटनेस मॉडल व जिम एक्सपर्ट जानवी पांडव के महत्वपूर्ण हेल्थ टिप्स Sports
  • CBSE ईस्ट ज़ोन शूटिंग प्रतियोगिता 2024-25 में DPS, Azad Nagar का शानदार प्रदर्शन Sports
  • Ganesh Visarjan
    Ganesh Visarjan : गणेश विसर्जन से पहले बन जाएंगे बिगड़े काम, ऐसे करें उपाय धर्म अध्यात्म

Copyright © 2026 .

Powered by PressBook News WordPress theme