होली 2026 की तारीखों का बड़ा कन्फ्यूजन –
आमतौर पर परंपरा यह है कि पूर्णिमा की रात होलिका दहन होता है और अगली सुबह प्रतिपदा तिथि में रंग खेला जाता है. लेकिन 2026 में ग्रहों की चाल ने इस क्रम को बदल दिया है –
🔸 होलिका दहन –
3 मार्च को प्रदोष काल मे शाम 06:46 से रात्रि 08:49 तक रहेगा।
बीच का दिन (विराम): 3 मार्च 2026 (मंगलवार – सूतक और ग्रहण काल)
रंगों की होली (धुलेंडी): 4 मार्च 2026 (बुधवार)
भद्रा का साया : क्यों रात 12:50 के बाद ही होगा होलिका दहन ?
शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है ‘भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा’ यानी भद्रा काल में रक्षाबंधन और होलिका दहन वर्जित है.
2 मार्च 2026 को शाम 05:55 बजे से पूर्णिमा तिथि शुरू होते ही ‘भद्रा’ का आगमन भी हो जाएगा. भद्रा को सूर्य देव की पुत्री और शनि देव की बहन माना गया है, जिनका स्वभाव अत्यंत उग्र है. श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार वाले प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार, भद्रा का मुख काल बेहद अशुभ होता है. इसलिए, जब भद्रा का ‘पुच्छ’ (पूछ) भाग समाप्त होगा, तभी होलिका की अग्नि प्रज्वलित की जाएगी.
भद्रा समाप्ति का समय: रात 12:50 बजे (2 मार्च की देर रात)
होलिका दहन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: रात 12:50 AM से 02:02 AM के बीच (2 मार्च की देर रात)
2026 की होली को जो चीज़ सबसे ज्यादा ‘विशेष’ और ‘दुर्लभ’ बनाती है, वह है पूर्ण चंद्र ग्रहण। यह ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगेगा.
यह ग्रहण भारत में चंद्रोदय से पूर्व ही प्रारंभ हो जाएगा यह चंद्र ग्रहण भारत के अधिकांश हिस्सों ग्रस्तोदित रूप में देखा जा सकेगा।
2024 और 2025 की होली पर भी ग्रहण लगे थे, लेकिन वे भारत में दिखाई नहीं दिए थे, इसलिए उनका धार्मिक प्रभाव शून्य था. मगर 2026 का चंद्र ग्रहण भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा.
सूतक काल शुरू: 3 मार्च 2026 की सुबह से (ग्रहण से 9 घंटे पहले).
ग्रहण का समय: दोपहर 03:19 बजे से शाम 06:47 बजे तक.
🔸 क्यों नहीं खेलेंगे रंग ? ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी अनुसार, सूतक काल और ग्रहण के दौरान उत्सव मनाना, शोर मचाना, भोजन करना और रंगों से खेलना वर्जित है. यह समय साधना और ईश्वर भक्ति का होता है. यही कारण है कि 3 मार्च को पूरा देश ‘सूतक’ में रहेगा और रंग नहीं खेले जाएंगे.
🔹 100 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग क्यो –
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा का कहना है कि होली के दिन ‘पूर्ण चंद्र ग्रहण’ का भारत में दिखाई देना एक शताब्दी घटना जैसा है. जब चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया से गुजरता है, तो वह तांबे जैसा लाल दिखने लगता है, जिसे ‘ब्लड मून’ कहते हैं. 2026 में होली की अग्नि के अगले ही दिन इस ‘लाल चाँद’ का दिखना आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टि से एक बड़ी घटना है. साल 2026 के पहले चंद्र ग्रहण के समय, चंद्रमा सिंह राशि में केतु के साथ होंगे. ऐसे में सिंह राशि वालों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ने वाला है. इससे पहले भारत देश मे ये दुर्लभ संयोग 100 साल पहले 08 मार्च 1926 मे होली पर चन्द्रग्रहण वाले दिन ही बना था।
सूतक और ग्रहण काल के दौरान क्या-क्या विशेष सावधानी बरतनी चाहिए 03 मार्च 2026 मंगलवार को प्रातः 6:20 से ग्रहण काल के सूतक प्रारंभ हो जाएंगे सूतकों में बाल वृद्ध रोगी आसक्त जनों को छोड़कर किसी अन्य को भोजन शयनादि नहीं करना चाहिए उदर (गर्भ) में जिन माताओ बहनों के गर्भस्थ शिशु पल रहे हैं उन्हें तीक्ष्ण धारदार चाकू छुरी कैंची आदि से फल सब्जी कपड़े इत्यादि को नहीं काटना चाहिए उन्हें अपने हाथ और पैरों के नाखूनों पर गेरू को लगाना चाहिए थोड़ा सा गिर मुंह में निगलले (खाना चाहिए) थोड़ा सा गेरू सिर के पल्लू पर या बालों में गेरू लगाना चाहिए ,व ग्रहण की सूतक से लेकर ग्रहण कल के दौरान अपने पति के किसी भी स्पर्श से दूर रहें उन्हें इस बीच ग्रहण जन्म दूषित समयको भगवान के भजन पूजन गुरु मंत्र आदि शुभ कार्य में लगाना चाहिए प्रातः 6:20 के बाद सभी मंदिरों के पट बंद रहेंगे जिससे देव दर्शन नहीं हो सकेंगे ग्रहण कल के बाद प्रत्येक व्यक्ति को स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद अपने भगवान जी को स्नान कराये उन्हें भोग प्रसाद लगाये उसके बाद दान पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है
ग्रहण की समाप्ति और शुद्धिकरण के बाद, 4 मार्च 2026, बुधवार को रंगों का त्योहार (धूल, धुलैंडी,छरैडी) मनाया जाएगा.
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भण्डार वाले पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी.9756402981,7500048250
