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Sakat Chauth Katha : सकट चौथ की पूजा एवं कथा के विषय में पंडित हृदय रंजन शर्मा से

Posted on January 23, 2024 By Manish Srivastava No Comments on Sakat Chauth Katha : सकट चौथ की पूजा एवं कथा के विषय में पंडित हृदय रंजन शर्मा से

Sakat Chauth Katha  : सकट चौथ सोमवार 29 जनवरी 2024, सकट चौथ की पूजा एवं कथा के विषय में विस्तृत जानकारी दे रहे हैं प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा ,अध्यक्ष ,श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार ,पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ

*🌸(माघ कृष्ण पक्ष दिन सोमवार 29 जनवरी 2024 कोही सकट चौथ का त्यौहार मनाया जाएगा| सकट चौथ का त्यौहार माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है| इस दिन संकट हरण गणपति गणेश जी की पूजा होती है| इस दिन कच्चे तेल को गुड में कूटकर तिलकुट बनाते हैं| इसे तिलकुटा भी कहते हैं| खाने में तेल में सिकने वाली चीज बनाते हैं| जैसे कचौड़ी बरूला चीले गुडवबाजरे के आटे की टिकिया आदि एक चकले पर चंदन या रोली से देवता को काडते हैं| एक दीपक जलाते हैं| 1 घंटे में पानी तिलकुट 4 या 8 कचौड़ी रख लेते हैं| इस दिन गणेश जी की पूजा होती है| पूजा के बाद सकट की कहानी सुनते हैं| पूजा करके खाना खाते हैं| यह त्यौहार किसी के यहां दिन का होता है| किसी के यहां रात का होता है इस दिन पुत्रवती स्त्रियां निर्जल रहकर शाम को फलाहार करती हैं इस दिन तिल को भूनकर गुड़ के साथ कूटा जाता है इससे तिलकुट का पहाड़ बनाया जाता है कहीं-कहीं तिलकुट का बकरा बनाकर उसकी पूजा करते हैं| घर का कोई पुत्र उसकी चाकू से गर्दन काटता है| यह त्यौहार किसी के यहां दिन का होता है| किसी के यहां रातका होता है| किसी के लड़का हो या नई शादी हुई हो तो कुड़वा रा लेने की परंपरा है| इस दिन चंद्रमा की भी पूजा करते हैं| किसी के यहां दिन की पूजा होती है| जो सूर्य की पूजा करते हैं.)




♦️सकट चौथ की कथा

*🍁किसी गांव में देवरानी-जेठानी रहती थी, जेठानी बहुत गरीब थी| देवरानी बहुत धंनवानथी, पैसे वाली थी, देवरानी के घर का काम चौका बर्तन सफाई झाड़ू जेठानी किया करती थी| एक दिन संकट चौथ का त्यौहार आया जेठानी ने देवरानी से कहा कि आज त्यौहार है| गुड दे दो तो देवरानी ने मना कर दिया, अपने घर जाकर उसने कुछ नहीं बनाया बथुआ की टिक्की रोटी बना कर पूजा कर ली| रात को उसके घर वाले ने उसे बहुत मारा आधी रात के करीब सकट देवता आए , तो बेचारी भूखी प्यासी रो रही थी , सकट देवता ने कहा मुझे भूख लग रही है| उसने कहा कि मेरे पास तो कुछ नहीं है ,बथुआ की रोटी है इसको खाओ तो खा लो सकट देवता ने खा लिया इसके बाद बोले कि मैं सो जाऊंगा कहां जाऊं जेठा ने कहा कर लो चारो कौने पांचवी दहलीज सकट देवता ने ऐसा ही किया सकट देवता ने कहा कि पौछूं किस्से कब जेठानी ने कहा पूछ लो मेरी ललाट से सकट देवता ने ऐसा ही किया सकट देवता चले गए सुबह उठकर देखा तो सारे घर में हीरा मोती सोना जवाहरात हो गई जेठानी ने देवरानी ने कहा कि आज जेठानी काम करने नहीं आई चलो चल कर देखूं देवरानी ने कहा कि उसके घर में तो ढेरों हीरा सोना पड़ा हुआ है| देवरानी ने कहा कि तुम काम करने क्यों नहीं आई जेठानी ने कहा कि अब मैं काम क्यों करुं मुझे तो सकट देवता ने सब कुछ दे दिया देवरानी ने कहा तुमने क्या किया कैसे खुश हुए सकट देवता मुझे बताओ , कृपया मुझे बताओ तब सब कुछ उसने उसे बता दिया दूसरे साल जब सकट चौथ आयी तो उसने ऐसा ही खाना बनाया और अपने पति से कहा मुझे मारो रात को सकट देवता आते है उसने ऐसा ही किया जो जेठानी ने उसे बताया था सकट देवता ने चारों कोने पांचवीं दहलीज में शौच कर ली और उसके ललाट से पौछ लिया सुबह उठकर देखा तो मक्खी भिनभिना रही थी तो देवरानी-जेठानी से लडने लगी जेठानी ने कहा मैंने तो ना होते पैसा किया ,तूने तो होते हुए भी ऐसा किया सकट महाराज जैसी जेठानी पर कृपा करी वैसे ही हम सब पर कृपा करना जय हो सकट महाराज आपकी|.

🌞प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परमपूज्य गुरूदेव पंडित. हृदय रंजन शर्मा ,अध्यक्ष,श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सराफा बाजार अलीगढ WhatsApp नंबर,9756402981,7500048250

धर्म अध्यात्म Tags:Sakat Chauth Katha

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