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कार्तिक पूर्णिमा

कार्तिक पूर्णिमा का जानें शुभ मुहूर्त, Know the auspicious time of Kartik Purnima

Posted on November 13, 2024 By Manish Srivastava No Comments on कार्तिक पूर्णिमा का जानें शुभ मुहूर्त, Know the auspicious time of Kartik Purnima

Aligarh : 15 नबम्बर 2024, शुक्रवार के दिन पूर्णिमा तिथि सुबह 06:19 से लग रही है जो 15 नवंबर दिन शुक्रवार की रात 02:58 तक पूर्णिमा तिथि मान्य रहेगी। अतः देव दीपावली 15 नबम्वर शुक्रवार और कार्तिकी पूर्णिमा का व्रत भी 15 नवंबर शुक्रवार को ही मान्य रहेगा।

कार्तिक पूर्णिमा, त्रिपुरारी पूर्णिमा, देव दीपावली के विषय पर बता रहे हैं प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार।
कार्तिक मास की पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली के त्रिपुरों का नाश किया था। त्रिपुरों का नाश करने के कारण ही भगवान शिव का एक नाम त्रिपुरारी भी प्रसिद्ध है। भगवान शिव ने कैसे किया त्रिपुरों का नाश, ये पूरी कथा इस प्रकार है।

ब्रह्माजी ने दिया था ये अनोखा वरदान शिवपुराण के अनुसार, दैत्य तारकासुर के तीन पुत्र थे- तारकाक्ष, कमलाक्ष वविद्युन्माली। जब भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर दिया तो उसके पुत्रों को बहुत दुःख हुआ। उन्होंने देवताओं से बदला लेने के लिए घोर तपस्या कर ब्रह्माजी को प्रसन्न कर लिया। जब ब्रह्माजी प्रकट हुए तो उन्होंने अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्माजी ने उन्हें इसके अलावा कोई दूसरा वरदान मांगने के लिए कहा
तब उन तीनों ने ब्रह्माजी से कहा कि- आप हमारे लिए तीन नगरों का निर्माण करवाईए।




हम इन नगरों में बैठकर सारी पृथ्वी पर आकाश मार्ग से घूमते रहें। एक हजार साल बाद हम एक जगह मिलें। उस समय जब हमारे तीनों पुर (नगर) मिलकर एक हो जाएं, तो जो देवता उन्हें एक ही बाण से नष्ट कर सके, वही हमारी मृत्यु का कारण हो। ब्रह्माजी ने उन्हें ये वरदान दे दिया। मयदानव ने किया था त्रिपुरों का निर्माणब्रह्माजी का वरदान पाकर तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली बहुत प्रसन्न हुए। ब्रह्माजी के कहने पर मयदानव ने उनके लिए तीन नगरों का निर्माण किया। उनमें से एक सोने का, एक चांदी का व एक लोहे का था।

सोने का नगर तारकाक्ष का था, चांदी का कमलाक्षका व लोहे का विद्युन्माली का।अपने पराक्रम से इन तीनों ने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया।इन दैत्यों से घबराकर इंद्र आदि सभी देवता भगवान शंकर की शरण में गए। देवताओं की बात सुनकर भगवान शिव त्रिपुरों का नाश करने के लिए तैयार हो गए। विश्वकर्मा ने भगवान शिव के लिए एक दिव्य रथ का निर्माण किया

ऐसे हुआ त्रिपुरों का नाश
चंद्रमा व सूर्य उसके पहिए बने, इंद्र,वरुण, यम और कुबेर आदि लोकपाल उस रथ के घोड़े बने हिमालय धनुष बने और शेषनाग उसकी प्रत्यंचा स्वयं भगवान विष्णु बाण तथा अग्निदेव उसकी नोक बनेउस दिव्य रथ परसवार होकर जब भगवान शिव त्रिपुरों का नाश करने के लिए चले तो दैत्यों में हाहाकर मच गया।दैत्यों व देवताओं में भयंकर युद्ध छिड़ गया।जैसे ही त्रिपुर एक सीध में आए,भगवान शिव ने दिव्य बाण चलाकर उनका नाश कर दिया त्रिपुरों का नाश होते ही सभी देवता भगवान शिव की जय-जयकार करने लगे त्रिपुरों का अंत करने के लिए ही भगवान शिव को त्रिपुरारी भी कहते हैं


https://youtu.be/C9kHNb9oZ60

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