Skip to content

The Xpress News

  • Home
  • धर्म अध्यात्म
  • Health
  • Blog
  • Toggle search form
  • Chennai vs Punjab: प्रियांश के शतक से पंजाब ने सुपरकिंग्स को हराया Sports
  • Railway's appeal
    Railway’s appeal : कोहरे में रेलवे लाइन पर न बैठे और न ही मवेशियों को लाइन के पास जाने दें Railway
  • World winner list
    World winner list : कब-कब किसने जीता वर्ल्ड कप, देखें पूरी लिस्ट Blog
  • डॉ अंजना सिंह सेंगर
    मॉरिशस के विश्व हिंदी सचिवालय में सम्मानित हुई डॉ अंजना सिंह सेंगर Motivation
  • कानपुर के खिलाड़ियों का दबदबा : बरेली यूपी स्टेट रैंकिंग टेबल टेनिस में 2 स्वर्ण, 2 रजत और 3 कांस्य पदक Sports
  • डॉ. मधुलिका शुक्ला
    कारगर इलाज के लिए चिकित्सक और मरीज के बीच भरोसा बहुत जरूरी : डॉ. मधुलिका शुक्ला Health
  • क्षेत्रीय बास्केटबॉल में जय नारायण व जुगल देवी बने चैंपियन Sports
  • Hartalika Teej
    महाशिवरात्रि पर शुभ योग, जानें चारों प्रहर का मुहूर्त, होगी भोलेनाथ की कृपा धर्म अध्यात्म

Relation of Shiva and Shravan : भगवान शिव को आखिर इतना क्यों पसंद है श्रावण मास

Posted on July 10, 2025July 10, 2025 By Manish Srivastava No Comments on Relation of Shiva and Shravan : भगवान शिव को आखिर इतना क्यों पसंद है श्रावण मास

Aligarh : भगवान शिव और श्रावण मास का आपस में बहुत गहरा संबंध (Relation of Shiva and Shravan) है। तो आइए आज आपको इस विषय पर विस्तृत जानकारी दे रहे हैं श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार वाले प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा जी।

सभी बारह महीनों का नाम बारह नक्षत्रों पर अधारित है और जिस तरह बारह राशियां होती है उसी तरह एक साल में बारह महीने भी होते हैं। श्रावण महीने का नाम श्रवण नक्षत्र पर अधारित है। जब भी श्रावण मास या श्रवण नक्षत्र का नाम आता है तब श्रवण कुमार की निःस्वार्थ माता – पिता की भक्ति याद आ जाती है। श्रवण नक्षत्र के स्वामी चन्द्रदेव और देवता भगवान विष्णु जी हैं। जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार में राजा बलि से तीन पग धरती मांगा था उस समय श्रवण नक्षत्र था। सावन या श्रावण साल का पांचवा महीना होता है और कुंडली का पांचवा भाव प्रेम, संतान, पूर्वपुण्य और ईष्ट देवता का होता है।

कहा जाता है कि जब समुद्र मंथन चल रहा था तो उस समय श्रावण मास था और जब मंथन से हलाहल विष निकला और भगवान शिव ने उसे ग्रहण किया तब माता पार्वती ने विष को उनके गले में रोक दिया था जिससे विष उदर तक नहीं पहुंच सका जिससे भगवान शिव नीलकंठ कहलाये लेकिन हलाहल विष गले में रुककर भगवान शिव को पीड़ा देने लगा।

उस पीड़ा से भगवान शिव को बचाने के लिए तीन घटनाये हुई  : 

चन्द्रदेव जो कि समुद्र मंथन से निकले थे वे भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान हुए जिससे भगवान शिव को शीतलता मिले और इसी कारण भगवान शिव को चंद्रशेखर कहा जाता है.

देवताओ ने वर्षा की ताकि भगवान शिव को शीतला मिले इसीलिए सावन मास में भगवान शिव को जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है.

उस समय का भगवान शिव का कोई महान भक्त (शायद रावण) कांवर में गंगाजल लेकर आया और भगवान शिव को चढ़ाया जिससे भगवान शिव हलाहल विष से पीड़ामुक्त हुए.




सावन मास में ही मार्कंडेय ऋषि ने भगवान शिव की तपस्या की थी.

जिस तरह सतयुग में ब्रह्मा जी का, त्रेतायुग में सूर्यदेव का और द्वापर युग में विष्णु भगवान का अधिपत्य या प्रभाव अधिक है उसी तरह कलियुग में गौरीपति भावगन शिव का विशेष महत्व है.

भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता है लेकिन अषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे देवयानी एकादशी कहते हैं से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं जिससे सृष्टि के पालन की जिम्मेदारी भगवान शिव पर आ जाती है। इसलिए भी सावन मास में भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती है। वैसे तो भगवान शिव का निवास स्थान कैलाश पर्वत है लेकिन कलियुग में भगवान शिव पृथ्वी छोड़ किसी अन्य लोक में चले गए लेकिन सावन महीने में वे अपने ससुराल (हिमालयराज के घर) आते हैं और पूरा सावन मास यहीं व्यतीत करते हैं। इसलिए सावन मास में कुँवारे हो या शादीशुदा, स्त्री हो या पुरुष सभी भगवान शिव की उपासना कर प्रेम की कामना करते हैं।

सावन मास में नये व्रतों की शुरुआत करना अच्छा माना जाता है.

सावन मास में सोमवार का दिन हो श्रवण या मघा नक्षत्र हो उस दिन कन्याए सोलह सोमवार के व्रत का संकल्प लेकर सोमवार व्रत की शुरुआत करे तो तो भगवान भोलेनाथ शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं और सुयोग्य एवं मनोवांछित वर का आशीर्वाद देते हैं। भगवान शिव को आक, कनेर, बेला, जूही, धतूरा और चमेली के फूल अति प्रिय है साथ में शमी के पत्ते एवं फूल और दूर्वा भी भगवान शिव को अति प्रिय है।

सबसे अधिक प्रिय है बेलपत्र…..और यदि बेलपत्र पर राम नाम लिख कर शिव जी को चढ़ाया जाय तो भगवान बहुत प्रसन्न होते हैं। भगवान शिव और भगवान विष्णु में अन्तर नहीं करना चाहिए….जो भगवान शिव की पूजा करता है और भगवान विष्णु की निंदा या भगवान विष्णु की पूजा करता है और शिव जी की निंदा उस पर कोई भी प्रसन्न नहीं होता और उसका पतन निश्चित है। सावन का महीना प्रेम और भक्ति का है…..प्रेम से भगवान शिव की आराधना करके प्रेम की कामना करिये।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें…

प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भण्डार वाले पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी व्हाट्सएप नंबर.9756402981,7500048250

धर्म अध्यात्म Tags:Maha Shivratri 2025, Relation of Shiva and Shravan

Post navigation

Previous Post: मकान की नींव में सर्प और कलश आखिर क्यों गाड़े जातें हैं? जानें पं. हृदय रंजन शर्मा जी
Next Post: घर में शिवलिंग स्थापित करने के विषय में सोच रहे हैं तो इन बातों का रखें विशेष ध्यान

Related Posts

  • Famous songs of Karva Chauth
    Radha Ashtami 2025 : राधा रानी का व्रत, पूजा-पाठ और पौराणिक कथा व शुभ मुहूर्त जानें पं हृदय रंजन शर्मा से धर्म अध्यात्म
  • कर्क राशि
    कर्क राशि वालों के लिए कैसा रहेगा नया साल, जानें डॉ रोशनी टाक से धर्म अध्यात्म
  • Skandamata Fifth Day
    मौनी अमावस्या रविवार 18 जनवरी, पंडित हृदय रंजन शर्मा से जानें महत्व धर्म अध्यात्म
  • होली
    Basant Panchami-2024 : बसंत पंचमी मनाने की जानें विधि, पौराणिक मान्यताएं, मां सरस्वती के विभिन्न स्वरूप धर्म अध्यात्म
  • कार्तिक पूर्णिमा
    shri krishna janmashtami : इन उपायों से मिलेगी सभी रोगों से मुक्ति, घर में आएगी समृद्धि धर्म अध्यात्म
  • Ramotsav 2024
    Ramotsav 2024 : 30 दिसंबर को त्रेतायुगीन वैभव में नजर आएगी रामनगरी धर्म अध्यात्म

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • सीएसके की खिलाड़ी डॉक्यूमेंट्री ‘ द मेकिंग ऑफ’ लांच Sports
  • उत्साह के साथ मनाया विश्व बैडमिंटन दिवस Sports
  • बीमारी से मुक्ति के लिए डॉक्टर पर विश्वास कर नियमित इलाज जरूरी : डॉ मेनका Health
  • एसएन बीवी पीजी कॉलेज में स्वछता अभियान चलाया गया Education
  • बेटी को निखारने में मां ‘यशोदा’ हिमानी की ‘भूमिका ‘ Education
  • Ayodhya
    Ayodhya :अयोध्या में अब सुग्रीव पथ बनवाएगी योगी सरकार धर्म अध्यात्म
  • अखिल भारतीय संगठन मंत्री विज्ञान भारती
    जुगल देवी सरस्वती विद्या मन्दिर का 46वां वार्षिकोत्सव एवं सांस्कृतिक समारोह सम्पन्न Education
  • Motivation
    Motivation : 2.3 मिलियन से अधिक फालोवर बनाना आसान नहीं था : रतन चौहान Motivation

Copyright © 2026 .

Powered by PressBook News WordPress theme