Skip to content

The Xpress News

  • Home
  • धर्म अध्यात्म
  • Health
  • Blog
  • Toggle search form
  • Hariyali Teej
    Hariyali Teej 2025 : हरियाली तीज 27 को, जानें इस त्योहार में क्या होता है खास धर्म अध्यात्म
  • धर्मनगरी अयोध्या
    प्रधानमंत्री के आगमन पर त्रेतायुगीन वैभव के अनुरूप सुसज्जित होगी धर्मनगरी अयोध्या धर्म अध्यात्म
  • टीचर्स सेल्फ केयर
    मदद का संकल्प ले, स्वामी विवेकानंद की राह में विवेकानंद की टीएससीटी Education
  • जय नारायण विद्या मंदिर
    जय नारायण विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में सांस्कृतिक वार्षिकोत्सव “अभ्युदय” का भव्य समारोह Education
  • ब्रह्मचारिणी
    Pitru Paksh 2023 : तर्पण के लिए सर्वोत्तम तिथियॉ हैं 3, 7 और 14 अक्टूबर : पं. ह्रदयरंजन शर्मा धर्म अध्यात्म
  • संस्कारयुक्त शिक्षा
    संस्कारयुक्त शिक्षा से होगा समाज का कल्याण : यतीन्द्र Education
  • एसएन सेन बालिका महाविद्यालय
    एसएन सेन बालिका महाविद्यालय में 563 छात्राओं को दिए गए स्मार्टफोन Education
  • Flag-Hoisting Ceremony at the Shiva Temple
    Flag-Hoisting Ceremony at the Shiva Temple : हमारे महापुरुषों को जातीय आधार पर बांटने वाले महापापी : योगी आदित्यनाथ धर्म अध्यात्म
शैलपुत्री

मकान की नींव में सर्प और कलश आखिर क्यों गाड़े जातें हैं? जानें पं. हृदय रंजन शर्मा जी

Posted on July 10, 2025July 10, 2025 By Manish Srivastava No Comments on मकान की नींव में सर्प और कलश आखिर क्यों गाड़े जातें हैं? जानें पं. हृदय रंजन शर्मा जी

Aligarh : मकान की नींव में सर्प और कलश क्यों गाड़ा जाता है ? तो आइए आज आपको इस विषय पर विस्तृत जानकारी दे रहे हैं श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भण्डार वाले प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पं.हृदय रंजन शर्मा जी।

श्रीमद्भागवत महापुराण के पांचवें स्कंद में लिखा है कि पृथ्वी के नीचे पाताल लोक है और इसके स्वामी शेषनाग हैं। भूमि से दस हजार योजन नीचे अतल, अतल से दस हजार योजन नीचे वितल, उससे दस हजार योजन नीचे सतल, इसी क्रम से सब लोक स्थित हैं। अतल, वितल, सतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल ये सातों लोक पाताल स्वर्ग कहलाते हैं। इनमें भी काम, भोग, ऐश्वर्य, आनन्द, विभूति ये वर्तमान हैं। दैत्य, दानव, नाग ये सब वहां आनन्द पूर्वक भोग-विलास करते हुए रहते हैं। इन सब पातालों में अनेक पुरियां प्रकाशमान रहती हैं। इनमें देवलोक की शोभा से भी अधिक बाटिका और उपवन हैं। इन पातालों में सूर्य आदि ग्रहों के न होने से दिन-रात्रि का विभाग नहीं है। इस कारण काल का भय नहीं रहता है। यहां बड़े-बड़े नागों के सिर की मणियां अंधकार दूर करती रहती हैं। पाताल में ही नाग लोक के पति वासुकी




आदि नाग रहते हैं। श्री शुकदेव के मतानुसार पाताल से तीस हजार योजन दूर शेषजी विराजमान हैं। शेषजी के सिर पर पृथ्वी रखी है। जब ये शेष प्रलय काल में जगत के संहार की इच्छा करते हैं, तो क्रोध से कुटिल भृकुटियों के मध्य तीन नेत्रों से युक्त 11 रुद्र त्रिशूल लिए प्रकट होते हैं। पौराणिक ग्रंथों में शेषनाग के फण (मस्तिष्क) पर पृथ्वी टिकी होने का उल्लेख मिलता है।

शेष चाकल्पयद्देवमनन्तं विश्वरूपिणम् । यो धारयति भूतानि धरां चेमां सपर्वताम् ॥
-महाभारत/भीष्मपर्व 67/13

अर्थात् इन परमदेव ने विश्वरूप अनंत नामक देवस्वरूप शेषनाग को उत्पन्न किया, जो पर्वतों सहित इस सारी पृथ्वी को तथा भूतमात्र को धारण किए हुए है।

उल्लेखनीय है कि हजार फणों वाले शेषनाग समस्त नागों के राजा हैं। भगवान् की शव्या बनकर सुख पहुंचाने वाले, उनके अनन्य भक्त हैं और बहुत बार भगवान् के साथ-साथ अवतार लेकर उनकी लीला में सम्मिलित भी रहते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता के 10वें अध्याय के 29वें श्लोक में भगवान् कृष्ण ने कहा है-अनन्तश्चास्मि नागानाम्’ अर्थात् मैं नागों में शेषनाग हूं।

नींव पूजन का पूरा कर्मकांड इस मनोवैज्ञानिक विश्वास पर आधारित है कि जैसे शेषनाग अपने फण पर संपूर्ण पृथ्वी को धारण किए हुए है, ठीक उसी प्रकार मेरे इस भवन की नींव भी प्रतिष्ठित किए हुए चांदी के नाग के फण पर पूर्ण मजबूती के साथ स्थापित रहे । शेषनाग क्षीरसागर में रहते हैं, इसलिए पूजन के कलश में दूध, दही, घी डालकर मंत्रों से आह्वान कर शेषनाग को बुलाया जाता है, ताकि वे साक्षात् उपस्थित होकर भवन की रक्षा का भार वहन करें। विष्णुरूपी कलश में लक्ष्मी स्वरूप सिक्का डालकर पुष्प व दूध पूजन में अर्पित किया जाता है, जो नागों को अतिप्रिय है। भगवान् शिवजी के आभूषण तो नाग है ही। लक्ष्मण और बलराम शेषावतार माने जाते हैं। इसी विश्वास से यह प्रथा जारी है।*




अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें ….
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पं.हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सराफा बाजार अलीगढ़ यूपी. व्हाट्सएप नंबर.9756402981,7500048250

धर्म अध्यात्म Tags:पं. हृदय रंजन शर्मा, मकान की नींव में सर्प गाड़ने का रहस्य

Post navigation

Previous Post: Jijamata felicitation ceremony : कुलदीप यादव, कोच कपिल पांडे व कुश चतुर्वेदी की माता को किया आमंत्रित
Next Post: Relation of Shiva and Shravan : भगवान शिव को आखिर इतना क्यों पसंद है श्रावण मास

Related Posts

  • Shri Hanuman Jayanti
    Shri Hanuman Jayanti : हनुमान जन्मोत्सव 12 अप्रैल को, जब हनुमान जी गए शिक्षा ग्रहण करने धर्म अध्यात्म
  • Skandamata Fifth Day
    28 अप्रैल से सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों पर लगी सवा दो महीने तक रोक धर्म अध्यात्म
  • होली
    कोजागिरीव्रत (शरद पूर्णिमा) 28अक्टूबर को, चंद्रमा के प्रकाश में रखी खीर खाने से अनेक रोग दूर हो जाते हैं धर्म अध्यात्म
  • Worship of Ravana
    Worship of Ravana : कानपुर में होती है रावण की पूजा, साल में सिर्फ दशहरा में खोला जाता है दशानन मंदिर धर्म अध्यात्म
  • Dhanteras
    Dhanteras 2023 : धनतेरस पर ये उपाय किया तो बरसेगी मां लक्ष्मी की विशेष कृपा धर्म अध्यात्म
  • PM Modi in Meera house
    PM Modi in Meera house : अयोध्या में मीरा के घर अचानक चाय पीने पहुंचे पीएम मोदी धर्म अध्यात्म

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Railway Update
    Railway Update : वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक प्रयागराज हिमांशु शुक्ला ने किया कानपुर के स्टेशनों का औचक निरीक्षण Railway
  • तृतीय चंद्रघंटा
    Dhanteras : मां लक्ष्मी की विशेष कृपा के लिए करें ये उपाय Blog
  • Ayodhya Ram mandir
    Ayodhya Ram mandir : रामलला के दर्शन को एक जनवरी से चलेगी विशेष बस UP Government News
  • Heatstroke
    Heatstroke : आईएमए कानपुर के विशेष डॉक्‍टरों ने हीट स्ट्रोक से सतर्क कर बचाव के तरीके बताए Sports
  • नवनीत कौर
    सफलता का दूसरा नाम है दिल्ली की एथलीट नवनीत कौर Health
  • Development Projects Launch
    Development Projects Launch : 2024 में 2014 और 2019 से भी बड़े बहुमत के साथ बनेगी मोदी सरकारः सीएम योगी UP Government News
  • साढ़े चार हजार विद्यार्थियों को मिलेगा स्मार्टफोन व टैबलेट का उपहार Blog
  • होली
    Makar Sankranti 2024 : स्नान और दान करने पर क्या मिलता हैं फल, जानें पंडित हृदय रंजन शर्मा धर्म अध्यात्म

Copyright © 2026 .

Powered by PressBook News WordPress theme