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ब्रह्मचारिणी

बलदेव छठ गुरुवार, 21 सितंबर को

Posted on September 11, 2023September 11, 2023 By Manish Srivastava No Comments on बलदेव छठ गुरुवार, 21 सितंबर को

बलदेव छठ गुरुवार, 21 सितंबर 2023 विशेष के विषय में विस्तृत जानकारी दे रहे हैं श्री गुरु ज्योतिषशोध संस्थान गुरु रत्न भंडार वाले प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदयरंजन शर्मा व्हाट्सएप नंबर-9756402981,7500048250

🔥बल्देव छठ का सम्बन्ध श्री बलराम जी से है।भाद्रपदशुक्ल पक्ष की षष्ठी को ब्रज के राजा और भगवान श्रीकृष्ण के अग्रज बल्देव जी का जन्मदिन ब्रज में बड़े ही उल्लास के साथ मनाया जाता है। ‘देवछठ’ के दिन दाऊजी में विशाल मेला आयोजित होता है और दाऊजी के मन्दिर में विशेष पूजा एवं दर्शन होते हैं।

♦️पौराणिक संदर्भ

☀️ब्रज के राजा दाऊजी महाराज के जन्म के विषय में ‘गर्ग पुराण’ के अनुसार देवकी के सप्तम गर्भ को योगमाया ने संकर्षण कर रोहिणी के गर्भ में पहुँचाया। भाद्रपद शुक्ल षष्ठी के स्वाति नक्षत्र में वसुदेव की पत्नी रोहिणी जो कि नन्दबाबा के यहाँ रहती थी, के गर्भ से अनन्तदेव ‘शेषावतार’ प्रकट हुए। इस कारण श्री दाऊजी महाराज का दूसरा नाम ‘संकर्षण’ हुआ। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि बुधवार के दिन मध्याह्न 12 बजे तुला लग्न तथा स्वाति नक्षत्र में बल्देव जी का जन्म हुआ। उस समय पाँच ग्रह उच्च के थे। इस समय आकाश से छोटी-छोटी वर्षा की बूँदें और देवता पुष्पों की वर्षा कर रहे थे।

🌻दाऊजी महाराज का नामकरण
🍁नन्दबाबा ने विधिविधान से कुलगुरु गर्गाचार्य जी से दाऊजी महाराज का नामकरण कराया। पालने में विराजमान शेषजी के दर्शन करने के लिए अनेक ऋषि, मुनि आये। ‘कृष्ण द्वैपायन व्यास’ महाराज ने नन्दबाबा को बताया कि यह बालक सबका मनोरथ पूर्ण करने वाला होगा। प्रथम रोहिणी सुत होने के कारण रोहिणेय द्वितीय सगे सम्बन्धियों और मित्रों को अपने गुणों से आनन्दित करेंगे।

💥बल्देव जी कृष्ण के बड़े भाई थे, दोनों भाइयों ने छठे वर्ष में प्रवेश करने के साथ ही समाज सेवा एवं दैत्य संहार का कार्य प्रारम्भ किया दिया था। उन्होंने श्रीकृष्ण के साथ मिलकर मथुरा के राजा कंस का वध किया। एक दिन किसी बात को लेकर दाऊजी महाराज जी कृष्ण से रुष्ट हो गये। इस बात को लेकर दाऊजी महाराज ने कालिन्दी की धारा को अपने हल की नोंक से विपरीत दिशा में मोड़ दिया। जिसका प्रमाण आज भी ब्रज में मौजूद है। ठाकुर श्री दाऊजी महाराज मल्ल विद्या के गुरु थे। साथ ही हल-मूसल होने के साथ वे ‘कृषक देव’ भी थे। आज भी किसान अपने कृषि कार्य प्रारम्भ करने से पहले दाऊजी महाराज को नमन करते हैं।पौराणिक आख्यान ब्रज के राजा पालक और संरक्षक कहे जाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के अग्रज बलराम पुराणों के अनुसार बलराम जी के रूप में शेषनाग के शेषयायी विष्णु भगवान के निर्देश पर अवतार लिया था। शेषनाग के जन्म की भी कथा है। कद्रू क गर्भ से कश्यप के पुत्र के रूप में शेषनाग का जन्म हुआ। भगवान विष्णु की आज्ञा से शेषनाग ने भूमण्डल को अपने सिर पर धारण कर लिया और सबसे नीचे के लोक में स्थित हो गये। तब अतिबल चाक्षप मनु पृथ्वी के सम्राट हुए। मनु ने यज्ञ किया और यज्ञ कुण्ड से ‘ज्योतिस्मती’ नामक कन्या उत्पन्न हुई। नागराज शेषनाग ने अपनी पत्नी ‘नागलक्ष्मी’ को आदेश दिया कि तुम मनु की कन्या के रूप में यज्ञ कुण्ड से उत्पन्न होना। एक दिन मनु ने स्नेह वश पुत्री से पूछा तुम कैसा वर चाहती हो? कन्या ने कहा कि जो सबसे अधिक बलवान हो, वही मेरा स्वामी हो। राजा ने सभी देवों को बुलाकर उनकी शक्ति को जाना तो उन्होंने भगवान संकर्षण को श्रेष्ठ बलवान बताते हुए उनके गुणों का बखान किया। संकर्षण को प्राप्त करने के लिए ज्योतिस्मती ने लाखों वर्षों तक विन्ध्याचल पर्वत पर तप किया। सबने अपने-अपने बल की प्रशंसा की लेकिन ज्योतिस्मती ने भगवान संकर्षण का स्मरण कर क्रोधित कर शनि को पंगु, शुक्र को काना, बृहस्पति को स्त्रीभाव, बुध को निष्फल, मंगल को वानरमुखी, चन्द्रमा को राज्य यक्ष्मा रोगी, सूर्य को दन्तविहीन, वरुण को जलन्धर रोग, यमराज को मानभंग का श्राप दे दिया। इन्द्र का श्राप ज्योतिषाल हो गया। तब ब्रह्मा जी की दृष्टि उस तेजस्विनी पर पड़ी, उन्होंने भगवान संकर्षण को प्राप्त करने का वरदान दिया, लेकिन तब तक 27 चतुर्युगी बीत गये। दाऊजी मन्दिर, बलदेव अवतार तब ज्योतिस्मती आनर्त देश के राजा रैवत कन्या रेवती की देह में विलीन हो गई। जब दैत्य सेनाओं ने राजाओं के रूप में उत्पन्न होकर पृथ्वी को भयानक भार से दबा दिया, तब पृथ्वी ने गौ का रूप धारण कर ब्रह्मा जी की शरण ली। देव श्रेष्ठ ब्रह्माजी ने शंकरजी को विरजा नदी के तट पर ‘भगवान संकर्षण’ के दर्शन किये। देवताओं ने उन्हें पृथ्वी के भार वृत्तांत सुनाया तब शेषशोभी भगवान शेषनाग से कहने लगे, तुम पहले रोहिणी के उदर से प्रकट हो, मैं देवकी के पुत्र के रूप में अभिभूर्त होऊँगा। इस प्रकार मल्ल विद्या के गुरु कृष्णाग्रज बलरामजी ने भाद्रपद मास षष्ठी तिथि बुधवार के दिन मध्याह्न के समय तुला लग्न में पाँच ग्रह उच्च के थे, रोहिणी आनन्द और सुख से तृत्प किया

💐प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी व्हाट्सएप नंबर-9756402981,7500048250

धर्म अध्यात्म Tags:Baldev Chhath, बलदेव छठ

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