Skip to content

The Xpress News

  • Home
  • धर्म अध्यात्म
  • Health
  • Blog
  • Toggle search form
  • Constable Recruitment Exam
    Constable Recruitment Exam : अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए रेलवे ने किए व्यापक इंतजाम Railway
  • होम्योपैथी चिकित्सा
    होम्योपैथी चिकित्सा में दवा का सही चयन जरूरी: डॉ. मधुलिका शुक्ला Health
  • ब्रह्मचारिणी
    शरद पूर्णिमा 28 अक्टूबर को, जानें विस्तार से Blog
  • World Cup 2023 Rules : विश्व कप 2023 की खासियत और नये नियम Sports
  • Women's Premier League
    Women’s Premier League : डि क्लर्क के आलराउंडर प्रदर्शन से आरसीबी ने मुंबई इंडियंस को तीन विकेट से हराया Sports
  • Stag Global table tennis tournament स्टैग ग्लोबल- टीएसएच 4th यू पी स्टेट रैंकिंग टेबल टेनिस टूर्नामेंट 19 सितम्बर से Sports
  • गाय-भैंस खरीदने से पहले लोग प्रियंका की लेते हैं राय Motivation
  • ब्रह्मचारिणी
    Dhanteras 2023 : धनतेरस के दिन लक्ष्मी जी के साथ धनवंतरि और कुबेर की भी पूजा की जानी चाहिए धर्म अध्यात्म
कार्तिक पूर्णिमा

कार्तिक पूर्णिमा का जानें शुभ मुहूर्त, Know the auspicious time of Kartik Purnima

Posted on November 13, 2024 By Manish Srivastava No Comments on कार्तिक पूर्णिमा का जानें शुभ मुहूर्त, Know the auspicious time of Kartik Purnima

Aligarh : 15 नबम्बर 2024, शुक्रवार के दिन पूर्णिमा तिथि सुबह 06:19 से लग रही है जो 15 नवंबर दिन शुक्रवार की रात 02:58 तक पूर्णिमा तिथि मान्य रहेगी। अतः देव दीपावली 15 नबम्वर शुक्रवार और कार्तिकी पूर्णिमा का व्रत भी 15 नवंबर शुक्रवार को ही मान्य रहेगा।

कार्तिक पूर्णिमा, त्रिपुरारी पूर्णिमा, देव दीपावली के विषय पर बता रहे हैं प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार।
कार्तिक मास की पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली के त्रिपुरों का नाश किया था। त्रिपुरों का नाश करने के कारण ही भगवान शिव का एक नाम त्रिपुरारी भी प्रसिद्ध है। भगवान शिव ने कैसे किया त्रिपुरों का नाश, ये पूरी कथा इस प्रकार है।

ब्रह्माजी ने दिया था ये अनोखा वरदान शिवपुराण के अनुसार, दैत्य तारकासुर के तीन पुत्र थे- तारकाक्ष, कमलाक्ष वविद्युन्माली। जब भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर दिया तो उसके पुत्रों को बहुत दुःख हुआ। उन्होंने देवताओं से बदला लेने के लिए घोर तपस्या कर ब्रह्माजी को प्रसन्न कर लिया। जब ब्रह्माजी प्रकट हुए तो उन्होंने अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्माजी ने उन्हें इसके अलावा कोई दूसरा वरदान मांगने के लिए कहा
तब उन तीनों ने ब्रह्माजी से कहा कि- आप हमारे लिए तीन नगरों का निर्माण करवाईए।




हम इन नगरों में बैठकर सारी पृथ्वी पर आकाश मार्ग से घूमते रहें। एक हजार साल बाद हम एक जगह मिलें। उस समय जब हमारे तीनों पुर (नगर) मिलकर एक हो जाएं, तो जो देवता उन्हें एक ही बाण से नष्ट कर सके, वही हमारी मृत्यु का कारण हो। ब्रह्माजी ने उन्हें ये वरदान दे दिया। मयदानव ने किया था त्रिपुरों का निर्माणब्रह्माजी का वरदान पाकर तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली बहुत प्रसन्न हुए। ब्रह्माजी के कहने पर मयदानव ने उनके लिए तीन नगरों का निर्माण किया। उनमें से एक सोने का, एक चांदी का व एक लोहे का था।

सोने का नगर तारकाक्ष का था, चांदी का कमलाक्षका व लोहे का विद्युन्माली का।अपने पराक्रम से इन तीनों ने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया।इन दैत्यों से घबराकर इंद्र आदि सभी देवता भगवान शंकर की शरण में गए। देवताओं की बात सुनकर भगवान शिव त्रिपुरों का नाश करने के लिए तैयार हो गए। विश्वकर्मा ने भगवान शिव के लिए एक दिव्य रथ का निर्माण किया

ऐसे हुआ त्रिपुरों का नाश
चंद्रमा व सूर्य उसके पहिए बने, इंद्र,वरुण, यम और कुबेर आदि लोकपाल उस रथ के घोड़े बने हिमालय धनुष बने और शेषनाग उसकी प्रत्यंचा स्वयं भगवान विष्णु बाण तथा अग्निदेव उसकी नोक बनेउस दिव्य रथ परसवार होकर जब भगवान शिव त्रिपुरों का नाश करने के लिए चले तो दैत्यों में हाहाकर मच गया।दैत्यों व देवताओं में भयंकर युद्ध छिड़ गया।जैसे ही त्रिपुर एक सीध में आए,भगवान शिव ने दिव्य बाण चलाकर उनका नाश कर दिया त्रिपुरों का नाश होते ही सभी देवता भगवान शिव की जय-जयकार करने लगे त्रिपुरों का अंत करने के लिए ही भगवान शिव को त्रिपुरारी भी कहते हैं


https://youtu.be/C9kHNb9oZ60

धर्म अध्यात्म

Post navigation

Previous Post: Kartik Purnima 2024 : कार्तिक पूर्णिमा को दान करने से मिलता है कई गुणा लाभ, Know the importance of Kartik Purnima
Next Post: Badminton Competition : अंतर विद्यालय बैडमिंटन प्रतियोगिता में जय नारायण विद्या मंदिर बना चैंपियन

Related Posts

  • शैलपुत्री
    Ahoi Ashtami : इस बार 4 शुभ संयोग के साथ पड़ रही है अहोई अष्टमी धर्म अध्यात्म
  • Shri Hanuman Jayanti
    Hanuman ji worship on Chhoti Diwali : छोटी दिपावली पर हनुमान जी की पूजा का जानें महत्व धर्म अध्यात्म
  • Durga Ashtami
    Raksha Bandhan-2024 : रक्षा बंधन पर जानिए पौराणिक काल के 10 भाइयों की प्रसिद्ध बहनों के विषय में धर्म अध्यात्म
  • Kharmas
    Rishi Panchami 28 August : ऋषि पंचमी का व्रत, कथा और पूजन विधि जानें धर्म अध्यात्म
  • Skandamata Fifth Day
    मौनी अमावस्या रविवार 18 जनवरी, पंडित हृदय रंजन शर्मा से जानें महत्व धर्म अध्यात्म
  • Hariyali Teej
    Shravan month special : भगवान शिव को अर्पित की जाने वाली हर चीज़ का फल होता है अलग धर्म अध्यात्म

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • मोदी जी की राह रोकने को दंगाबाज और दगाबाज लगा रहे बैरियर : सीएम योगी Blog
  • लता मंगेशकर चौक
    लता मंगेशकर चौक की सुंदरता देख पीएम हुए भाव विभोर, सीएम योगी से ली जानकारी Blog
  • होली
    खरमास खत्म, शुभ कार्य शुरू, नववर्ष में 59 शुभ मुहूर्त, गूंजेगी विवाह की शहनाई धर्म अध्यात्म
  • स्वस्थ शरीर
    स्वस्थ शरीर से बढ़कर कोई धन नहीं : डॉ. मधुलिका शुक्ला Health
  • जय नारायण विद्या मंदिर
    जय नारायण विद्या मंदिर के विद्यार्थियों ने ली यातायात के नियम पालन की शपथ, देखें वीडियो Education
  • Eng vs NZ World Cup match
    Eng vs NZ World Cup match : न्यूजीलैंड ने किया इंग्लैंड के साथ खिलवाड़, नौ विकेट से हराया Sports
  • रेल कर्मचारियों की सतर्कता से टली बड़ी दुर्घटना Blog
  • त्वचा के रोग होने में प्रदूषण भी एक प्रमुख कारण : डॉक्टर मधुलिका शुक्ला Health

Copyright © 2026 .

Powered by PressBook News WordPress theme