Skip to content

The Xpress News

  • Home
  • धर्म अध्यात्म
  • Health
  • Blog
  • Toggle search form
  • प्रो कुश्ती लीग
    प्रो कुश्ती लीग की चुनौती के लिए तैयारी में जुटी अंतिम पंघाल Sports
  • Skandamata Fifth Day
    Raksha Bandhan Muhurta : जानें रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त व विशेष उपाय धर्म अध्यात्म
  • Fitness Mantra
    Fitness Mantra : एक्सपर्ट की देखरेख में ही एक्सरसाइज करनी चाहिए : प्रियंका द्विवेदी Health
  • प्रदेश में कोहरे का कहर, ठंड से राहत के आसार नहीं Education
  • होली
    Mauni Amavasya : मौनी अमावस्या का जानें महत्व, व्रत नियम, उपाय, कथा और मुहूर्त Blog
  • गुजरात टाइटन्स की लगातार चौथी जीत Sports
  • ब्रह्मचारिणी
    भगवान श्रीकृष्ण की छठी पूजा 12 सितंबर को धर्म अध्यात्म
  • बैडमिंटन रैंकिंग टूर्नामेंट
    बैडमिंटन प्रतियोगिता में जूनियर खिलाडियों ने जमकर दिखाया उत्साह Sports
Hariyali Teej

Hariyali Teej 2025 : हरियाली तीज 27 को, जानें इस त्योहार में क्या होता है खास

Posted on July 11, 2025July 12, 2025 By Manish Srivastava No Comments on Hariyali Teej 2025 : हरियाली तीज 27 को, जानें इस त्योहार में क्या होता है खास

Aligarh : हरियाली तीज (मधुश्रवातीज) (Hariyali Teej ) 27 जुलाई 2025 रविवार को है। इस विशेष में विस्तृत जानकारी दे रहे श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार वाले प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा जी।

सावन का महीना प्रेम और उत्साह का महीना माना जाता है। प्रेम के धागे को मजबूत करने के लिए इस महीने में कई त्योहार मनाये जाते हैं। इन्हीं में से एक त्योहार है- ‘हरियाली तीज’। यह त्योहार हर साल श्रावण माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस त्योहार के विषय में मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की थी। इससे प्रसन्न होकर शिव ने ‘हरियाली तीज’ के दिन ही पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इस त्योहार के विषय में यह मान्यता भी है कि इससे सुहाग की उम्र लंबी होती है।




हरियाली तीज से एक दिन पहले द्वितीया का श्रृंगार दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसे सिंजारा कहते हैं। बहू बेटियों को 9-9 प्रकार के मिष्ठान व पकवान बनाकर खिलाए जाते हैं। सिंघारा वाले दिन किशोरी एवं नव विवाहिता वधुएं इस पर्व को मनाने के लिए अपने हाथों और पावों में कलात्मक ढंग से मेहंदी लगाती हैं। तीज के दिन स्त्रियां सोलह श्रृंगार करती हैं, जिनमें हरी साड़ी और हरी चूड़‍ियों का विशेष महत्‍व है. दिन-भर स्त्रियां तीज के गीत गाती हैं और नाचती हैं. हरियाली तीज पर झूला झूलने का भी विधान हैं. स्त्रियां अपनी सहेलियों के साथ झूला झूलती हैं. कई जगह पति के साथ झूला झूलने की भी परंपरा है। नई-नवेली दुल्हन अपने मायके जाकर भी झूला झूलती हैं और सखियों से अपने पिया और उनके प्रेम की बातें करती है।

कुंवारी कन्याओं को इस व्रत से मनचाहा जीवन साथी मिलता है। हरियाली तीज में हरी चूड़ियां, हरा वस्त्र और मेंहदी का विशेष महत्व है। मेंहदी सुहाग का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। इसलिए महिलाएं सुहाग पर्व में मेंहदी जरूर लगाती हैं। इसकी शीतल तासीर प्रेम और उमंग को संतुलन प्रदान करने का भी काम करती है। माना जाता है कि मेंहदी बुरी भावना को नियंत्रित करती है। हरियाली तीज का नियम है कि क्रोध को मन में नहीं आने दें। मेंहदी का औषधीय गुण इसमें महिलाओं की मदद करता है। सावन में पड़ने वाली फुहारों से प्रकृति में हरियाली छा जाती है। सुहागन स्त्रियां प्रकृति की इसी हरियाली को अपने ऊपर समेट लेती हैं। इस मौके पर नई-नवेली दुल्हन को सास उपहार भेजकर आशीर्वाद देती है।

शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन के बाद चंद्रमा की पूजा की जाती है। इस दिन सुहागिन स्त्रियों को श्रृंगार का सामान भेंट किया जाता है। खासकर घर के बड़े-बुजुर्ग या सास-ससुर बहू को श्रृंगार दान देते हैं। हरियाली तीज के दिन खान-पान पर भी विशेष ज़ोर दिया जाता है। हालांकि इस दिन स्त्रियां निर्जला व्रत रखती हैं, लेकिन फिर भी बिना मिठाइयों के त्‍योहार कैसा? तीज के मौके पर विशेष रूप से घेवर, जलेबी और मालपुए बनाए जाते हैं। रात के समय खाने में पूरी, खीर, हल्‍वा, रायता, सब्‍जी और पुलाव बनाया जाता है।

मुख्य रूप से राजस्थान के साथ कुछ और भी राज्यो में यह त्योहार मुख्य रूप से मनाया जाता है। कुल मिलाकर इस त्योहार का आशय यह है कि सावन की फुहारों की तरह सुहागनें प्रेम की फुहारों से अपने परिवार को खुशहाली प्रदान करेंगी और वंश को आगे बढ़ाएँगी।

♦पूजा और श्रृंगार सामग्री

हरियाली तीज के दिन व्रत रखा जाता है और पूजा के लिए कुछ जरूरी सामान की आवश्‍यकता होती है। पूजा के लिए काले रंग की गीली मिट्टी, पीले रंग का कपड़ा, बेल पत्र, जनेऊ, धूप-अगरबत्ती, कपूर, श्रीफल, कलश, अबीर, चंदन, तेल, घी,दही, शहद दूध और पंचामृत चाहिए . वहीं, इस दिन पार्वती जी का श्रृंगार किया जाता है और इसके लिए चूड़‍ियां, आल्‍ता, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, कंघी, शीशा, काजल, कुमकुम, सुहाग पूड़ा और श्रृंगार की अन्‍य चीजों की जरूरत होती है।




♦पूजा विधि

  • सुबह उठकर स्‍नान करने के बाद मन में व्रत का निम्न मंत्र पढ़ ‘उमामहेश्वरसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये’ संकल्‍प लेना चाहिये।
  • सबसे पहले घर के मंदिर में काली मिट्टी से भगवान शिव शंकर, माता पार्वती और गणेश की मूर्ति बनाएं।
  • अब इन मूर्तियों को तिलक लगाएं और फल-फूल अर्पित करें।
  • फिर माता पार्वती को एक-एक कर सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
  • इसके बाद भगवान शिव को बेल पत्र और पीला वस्‍त्र चढ़ाएं।
  • तीज की कथा पढ़ने या सुनने के बाद आरती करें।
  • अगले दिन सुबह माता पार्वती को सिंदूर अर्पित कर भोग चढ़ाएं।
  • प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत का पारण करें।

♦हरियाली तीज व्रत कथा

शिवजी कहते हैं, ‘हे पार्वती! बहुत समय पहले तुमने हिमालय पर मुझे वर के रूप में पाने के लिए घोर तप किया था। इस दौरान तुमने अन्न-जल त्याग कर सूखे पत्ते चबाकर दिन व्यतीत किया था। मौसम की परवाह किए बिना तुमने निरंतर तप किया. तुम्हारी इस स्थिति को देखकर तुम्हारे पिता बहुत दुःखी और नाराज़ थे. ऐसी स्थिति में नारदजी तुम्हारे घर पधारे।
जब तुम्हारे पिता ने उनसे आगमन का कारण पूछा तो नारदजी बोले- ‘हे गिरिराज! मैं भगवान् विष्णु के भेजने पर यहां आया हूं आपकी कन्या की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर वह उससे विवाह करना चाहते हैं। इस बारे में मैं आपकी राय जानना चाहता हूं’ नारदजी की बात सुनकर पर्वतराज अति प्रसन्नता के साथ बोले- हे नारदजी! यदि स्वयं भगवान विष्णु मेरी कन्या से विवाह करना चाहते हैं तो इससे बड़ी कोई बात नहीं हो सकतीमैं इस विवाह के लिए तैयार हूं’।

शिवजी पार्वती जी से कहते हैं, ‘तुम्हारे पिता की स्वीकृति पाकर नारदजी, विष्णुजी के पास गए और यह शुभ समाचार सुनाया. लेकिन जब तुम्हें इस विवाह के बारे में पता चला तो तुम्हें बहुत दुख हुआ. तुम मुझे यानी कैलाशपति शिव को मन से अपना पति मान चुकी थी।
तुमने अपने व्याकुल मन की बात अपनी सहेली को बताई तुम्हारी सहेली ने सुझाव दिया कि वह तुम्हें एक घनघोर वन में ले जाकर छुपा देगी और वहां रहकर तुम शिवजी को प्राप्त करने की साधना करना। इसके बाद तुम्हारे पिता तुम्हें घर में न पाकर बड़े चिंतित और दुःखी हुए। वह सोचने लगे कि यदि विष्णुजी बारात लेकर आ गए और तुम घर पर ना मिली तो क्या होगा? उन्होंने तुम्हारी खोज में धरती-पाताल एक करवा दिए लेकिन तुम ना मिली। तुम वन में एक गुफा के भीतर मेरी आराधना में लीन थी। श्रावण तृतीय शुक्ल को तुमने रेत से एक शिवलिंग का निर्माण कर मेरी आराधना कि जिससे प्रसन्न होकर मैंने तुम्हारी मनोकामना पूर्ण की इसके बाद तुमने अपने पिता से कहा, ‘पिताजी! मैंने अपने जीवन का लंबा समय भगवान शिव की तपस्या में बिताया है और भगवान शिव ने मेरी तपस्या से प्रसन्न होकर मुझे स्वीकार भी कर लिया है अब मैं आपके साथ एक ही शर्त पर चलूंगी कि आप मेरा विवाह भगवान शिव के साथ ही करेंगे’ पर्वत राज ने तुम्हारी इच्छा स्वीकार कर ली और तुम्हें घर वापस ले गए. कुछ समय बाद उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ हमारा विवाह किया’।
भगवान् शिव ने इसके बाद बताया, ‘हे पार्वती! श्रावण शुक्ल तृतीया को तुमने मेरी आराधना करके जो व्रत किया था, उसी के परिणाम स्वरूप हम दोनों का विवाह संभव हो सका इस व्रत का महत्‍व यह है कि मैं इस व्रत को पूर्ण निष्ठा से करने वाली प्रत्येक स्त्री को मन वांछित फल देता हूं’ भगवान शिव ने पार्वती जी से कहा कि इस व्रत को जो भी स्त्री पूर्ण श्रद्धा से करेंगी उसे तुम्हारी तरह अचल सुहाग प्राप्त होगा।




अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें…
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी व्हाट्सएप नंबर-9756402981,8272809774

धर्म अध्यात्म Tags:Hariyali Teej, Hariyali Teej 2025

Post navigation

Previous Post: रात में शिवलिंग के पास जलाना चाहिए दीपक, जानिये क्यों
Next Post: क्रीड़ा भारती कानपुर महानगर ने 22 माताओं को दिया प्रथम जीजा माता सम्मान

Related Posts

  • होली
    कोजागिरीव्रत (शरद पूर्णिमा) 28अक्टूबर को, चंद्रमा के प्रकाश में रखी खीर खाने से अनेक रोग दूर हो जाते हैं धर्म अध्यात्म
  • Pancham Skandamata
    Navratri 2023 : मां दुर्गा जी के जानें नौ नाम, रूप और मंत्र धर्म अध्यात्म
  • PM welcome in Ayodhya
    PM welcome in Ayodhya : शंख व डमरू वादन से राम नगरी में पीएम का होगा अभूतपूर्व स्वागत धर्म अध्यात्म
  • Kharmas
    रात में शिवलिंग के पास जलाना चाहिए दीपक, जानिये क्यों धर्म अध्यात्म
  • कार्तिक पूर्णिमा
    Hindu New Year : हिन्दूओं का नववर्ष 9 अप्रैल से आरंभ हो रहा है, जानें गुड़ी पड़वा का महत्व धर्म अध्यात्म
  • भारतीय संस्कृति
    भारतीय संस्कृति और परिधानों को संजोए हैं बिंदिया शर्मा धर्म अध्यात्म

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • स्टैग-टीएसएच 4th यूपी स्टेट रैंकिंग टेबल टेनिस टूर्नामेंट का पुरस्कार एवं सम्मान समारोह सम्पन्न Sports
  • Rajya Sabha elections :
    Rajya Sabha elections : बसंत पंचमी पर भाजपा के सातों प्रत्याशियों ने किया नामांकन Politics
  • बुलंद हौसलों से इबारत लिख रहीं गोल्डन गर्ल अहाना मिश्रा Health
  • पहलगाम में जिन महिलाओं ने पतियों को खोया, उनमें नहीं था वीरांगना का भाव Crime
  • Raill
    Kashi Tamil Sangamam Special Special Train : काशी तमिल संगमम के अवसर पर चलेगी विशेष गाड़ी, जानें पूरा शेड्यूल Blog
  • Ayodhya Ram mandir
    Ayodhya Ram mandir : रामलला के दर्शन को एक जनवरी से चलेगी विशेष बस UP Government News
  • करवा चौथ का मुहूर्त
    Mahashivratri-2024 : इस महाशिवरात्रि पर अपनी राशि अनुसार करें शिवजी का पूजन धर्म अध्यात्म
  • करवा चौथ का मुहूर्त
    करवा चौथ का मुहूर्त व महत्‍व और पूजन विधि : Importance and auspicious time of Karva Chauth धर्म अध्यात्म

Copyright © 2026 .

Powered by PressBook News WordPress theme