अलीगढ़ । चैत्र नवरात्र की पूजा विधि घट स्थापना मुहूर्त एवं पूजा पाठ के विषय में बता रहे हैं। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार वाले पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी WhatsApp नंबर-9756402981, 8272809774

इस बार गुरुवार 19 मार्च 2026 सुबह 06:53 से ही पड़वा लग रही है। इसलिए 19 मार्च 2026 दिन गुरुवार से ही नवरात्र के कलश की स्थापना होगी चैत्र नवरात्रि 2026 इस वर्षपूरे 9 दिन के ही होंगे। नवरात्रि साल में दो बार नवरात्रि आते हैं पहले चैत्र नवरात्र और दूसरे शारदीय नवरात्र इसके अलावा वर्ष में दो गुप्त नवरात्रि पर भी लोग मां दुर्गा की पूजा अर्चना करते हैं गर्मियों की शुरुआत में आने वाले चैत्र नवरात्र का भी अपना विशेष महत्व होता है। दरअसल चैत्र नवरात्र से नववर्ष के पंचांग की गणना प्रारंभ हो जाती है नवरात्र के नौ दिनों में माता के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा अर्चनाकी जाती है इस वर्ष 2026 में 19 मार्च दिन गुरुवार से नवरात्र प्रारंभ होंगे 19 मार्च से शुरू होने वाले नवरात्र 27 मार्च तक चलेंगे नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना की जाती है इसके बाद 9 दिन तक व्रत रखने वाली माताएं बहने,भक्तलोग अपनी अपनी मनोकामनाओं हेतु उपवास, पूजा पाठ ,पूजा अर्चना करतेहैं आषाढ़ और माघमास के शुक्ल पक्ष में पडने वाले नवरात्र गुप्त नवरात्रि कहलाते हैं!
कलश स्थापना के साथ 19 मार्च 2026 गुरूवार से चैत्र नवरात्र का पूजन प्रारंभ होगा 27 मार्च को राम नवमी मनाई जाएगी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक माता जगदंबा की पूजा-अर्चना विशेष फलदाई होती है इस बार चैत्र नवरात्र सर्वार्थ सिद्धि योगमै प्रारंभ हो रहे हैं , नवरात्रों की शुरुआत सनातन काल से हुई थी सबसे पहले भगवान श्री रामचंद्र जी ने समुद्र के किनारे 9 दिन तक दुर्गा मां की पूजा की थी इसके बाद ही उन्होंने लंका की तरफ प्रस्थान किया था। इसी कारण युद्ध में विजय श्रीप्राप्त हुई चैत्र मास के नवरात्र लगते ही हिंदू सनातनी नव वर्ष का आरंभ हो जाता है गुरुवार 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्र का शुभारंभ होने जा रहा है नवरात्रि के पहले दिन सर्वार्थ सिद्धि योग पड़ रहा है। जिसे शास्त्रों में बहुत ही शुभ माना जाता है।
साथ ही इस नवरात्र का पहला दिन गुरुवार का पड़ रहा है इन दोनों का योग से कोई भी शुभ कार्य अगर प्रारंभ किया जाए तो वह बहुत ही जल्दी पूरे होते हैं इस बार चैत्र नवरात्र 9 दिन के ही होंगे नवरात्रि के नौ दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बहुत ही शुभ लाभ दायक होता है इस दौरान देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा आराधना की जाती है पाठ करते समय पूजा घर में साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए नवरात्र पर भक्त मां के लिए 9 दिनों तक उपवास रखते हैं अष्टमी और नवमी वाले दिन कन्या पूजन कन्या लांगुर जिमाने के बाद ही अपना उपवास खोला जाता है इस बार 27 मार्च 2026 को कन्या पूजन रामनवमी कन्या लागुरा जिमाने के साथ ही व्रत का पारण होगा
घट स्थाप्ना हेतू शुभ महूर्त
इस बार घट स्थापना काअति शुभ मुहूर्त नौकरी पेशा व्यक्तियों के लिए प्रातः 06:53 बजे से प्रातः 9:17 तक , जो पूजा-पाठ करने वालों की नौकरी धंधे में उन्नति व लाभ का सूचक है इसके बाद एक बहुत हीशानदार “अभिजित” का चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध रहेंगा जो दिवाकाल 11:16 से दोपहर 03:46जिसमें चंचल, लाभ ,अमृत वेला रहेगी इसमें घर घरेलू लोग एवं व्यापारी वर्ग के लोगों के लिए बहुत ही शानदार पूजा पाठ का मुहूर्त कहलाया जा सकता हैं जिसमें पूजा पाठ करने से विद्यार्थियों को व्यापारियों एवं शादी विवाह योग्य लड़का लड़कियों एवं गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए विशेष रूप से कहलाए जाएंगे स्थापना करनी माता रानी भक्तों की समस्त प्रकार की इच्छाओं की पूर्ति करती हैं
पूजन की विधि
पड़वा दिन गुरुवार 19 मार्च 2026 को सुबह उठकर पूजाघर कोसाफशुद्धकरे चूना कलई करे देवी देवताओको गंगा जल से स्नानकराये पूजाघर मे लाल, गुलाबी,पीला केसरिया,हरा वस्त्र बिछाए फिर माता रानी की मूर्ति को गंगाजल पंचामृत से स्नान कराएं और पति पत्नी अपने हाथों से माता रानी की स्थापना पूरब या पश्चिम की ओर करें अपने सीधे हाथ की तरफ घट स्थापित करें घड़े पर रोली से (शुभ )(स्वास्तिक)( लाभ )का चिन्ह बनाकर उस पर सरवेमें बजना नारियल (पानी वाला) लाल चुनरी ओढ़ाकर रखें इस दिन से ही शुभ कार्यों पर लगीहुईरुकावट( ब्रेक)हट जाते हैं
प्रथम शैलपुत्री
*नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के शैल पुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है सती जन्म मैं राजा दक्ष प्रजापति की पुत्री थी एक बार राजा दक्ष नेयज्ञ किया लेकिन अपने दामाद शंकर जी को आमंत्रित नहीं किया पिता के यज्ञ मैं बिना आमंत्रण के सतीशामिल हुई वहां अपमान से कुपित होकर सती ने यज्ञाग्नि मैं अपनाआत्मोत्सर्ग (आत्मदाह) कर लिया इसके बाद भगवान शंकर ने तांडव कियाभगवान शिव का यह रूप “काल कालेश्वर “कहा गया है सती का ही दूसरा स्वरूप माता पार्वती या शैलपुत्री का है पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण ही मां दुर्गा केप्रथम स्वरूप का नाम शैलपुत्री पड़ा है इन्हें हेमवतीके नाम से भी जानते हैं उपनिषद की एक कथा अनुसार इन्ही ने हेमवती स्वरूपसे देवताओं का गर्व भंजन किया था नवदुर्गाओं में प्रथम शैलपुत्री का महत्व और शक्तियां अनंत है कठोर तपके कारण भगवान शिव शंकर से ही इनका व्यवहार हुआ शैलपुत्री ही शिवांगी है सौभाग्य प्रकृति और आयु की देवीहै इस दिन उपासना में योगी अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थिर कर साधना करते हैं माता शैलपुत्री को मेहरून रंग का चोला पसंद है पीला रंग पसंद है रोग में सफेद चीजें या गाय के घी से बनी चीजें बहुत पसंद है साधकको यह सब पूजापाठकरने से सभी प्रकार के रोग दोषों से मुक्ति मिलती है, **पूजा का मंत्र*
या देवी सर्वभूतेषु प्रकृति रूपेण संस्थिता !
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
शुभ कार्यों हेतु विशेष शुभ दिन
इस बार नवरात्र में 20, 21 ,23,25 मार्च 2026 विशेष शुभदिनमाने जाएंगे जिसमें मकान, जायजाद, प्लाट ,वाहन, शादी विवाह एवं घरेलू खरीद फरोख्त,वर वधू देखना पक्का करना आदिशुभ कार्य किए जा सकते हैं यह इन सभी शुभ कार्यो हेतुविषेशशुभ दिन मानेजाएगे
🌞प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरूदेवपंडित ह्रदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार वाले पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी WhatsApp नंबर-9756402981,
8272809774*
