Skip to content

The Xpress News

  • Home
  • धर्म अध्यात्म
  • Health
  • Blog
  • Toggle search form
  • Neeraj Chopra Classic Championship
    Neeraj Chopra Classic Championship : मेजबान और प्रतियोगी चोपड़ा बने एनसी क्लासिक के पहले सत्र के चैंपियन Sports
  • Karva Chauth ka pauranik mahatve
    Raksha Bandhan-2024 : रक्षा बंधन पर जानिए पौराणिक काल के 10 भाइयों की प्रसिद्ध बहनों के विषय में धर्म अध्यात्म
  • lunar eclipse
    Makar Sankranti 2025 : मकर संक्रांति पर दिया गया दान बढ़कर पुनः प्राप्त होता है 100 गुना धर्म अध्यात्म
  • Lohri festival
    Shri Ganesh – Mahalakshmi worship : श्री गणेश -महालक्ष्मी पूजन का मुहूर्त, कैसे करें पूजा पाठ धर्म अध्यात्म
  • Inspirational Story
    Inspirational Story : बेहद खूबसूरत और मल्टी टैलेंटेड गर्ल हैं हरियाणा की श्वेता मेहता Motivation
  • श्रीराम लला के दर्शन
    प्राण प्रतिष्ठा के दूसरे दिन ढाई लाख से ज्यादा भक्तों ने किए प्रभु श्रीराम लला के दर्शन Blog
  • लखनवी अंदाज में “चार चांद”लगा देती है साड़ी : अहाना मिश्रा मनोरंजन
  • बैडमिंटन टूर्नामेंट
    प्रदेश का पहला जिला रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट 26 से कानपुर में Sports
lunar eclipse

Dashara: विजय दशमी की पूजा का मुहूर्त, अचूक मंत्र और महत्व

Posted on October 2, 2025October 2, 2025 By Manish Srivastava No Comments on Dashara: विजय दशमी की पूजा का मुहूर्त, अचूक मंत्र और महत्व

Aligarh : दशहरा (विजयदशमी,आयुध-पूजा)शमी पूजा,02/10/2025 दिन गुरुवार, के विषय में विस्तृत जानकारी दे रहे हैं गुरु रत्न भंडार वाले।
*🏵दशमी तिथि और श्रवण नक्षत्र का निर्धारण*
*🌻दशमी तिथि प्रारंभ 01 अक्टूबर 2025 बुधवार सायं 07:01 से*
*🌻दशमी तिथि का समापन 02अक्टूबर 2025 दिन गुरुवार सांय 07:10 बजे तक*
*🌻श्रवण नक्षत्र 02 अक्टूबर 2025 की सुबह 09:12 बजे से 02 अक्टूबर 2025की सुबह 09:33 मिनट तक रहेगा इसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र प्रारंभ हो जाएगा*
*🍁 विश्व प्रसिद्ध चौघड़िया मुहूर्त अनुसार पूजा पाठ एवं शुभ कार्य हेतु शुभ समय कौन से हैं*




*♦ विजय दशमी दशहरा पर शस्त्र पूजा किताब कॉपियों की पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त काल में दिवाकाल 10:40 से दोपहर 03:30 के बीच पूजा का सर्वोत्तम समय रहेगा इस समय संकल्प, शुभारंभ ,नूतन कार्य ,गुरु पूजन ,अस्त्र शस्त्र पूजन, शमी पूजन ,वाहन विवाह शादी की खरीदारी भूमि भवन हेतु किसी भी कार्य का शुभारंभ किसी भी विशेष कार्य हेतु अनुष्ठान पूजा पाठ गृह प्रवेश नए कार्य का शुभारंभ हेतु सर्वोत्तम समय कहां जाएगा इस समय विश्व प्रसिद्ध चौघड़िया मुहूर्त अनुसार चर ,लाभ ,अमृत के तीन विश्व प्रसिद्ध चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध होंगे जो किसी भी कार्य के लिए सर्वोत्तम कहे जाते हैं इसके बाद एक और शुभ मुहूर्त “विजय मुहूर्त” के नाम से दोपहर 12:10 से दोपहर 01:27 के बीच में है शुभ का चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध होगा जो किसी भी शुभ कार्य हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण एवं लाभदायक कहा जाएगा*
*💥सर्व सिद्धि दायक विजय काल- दशहरे के दिन शाम को जब सूरज अस्त होने का समय और आकाश में तारे उदय होने का समय होता है वह है सर्व सिद्धि दायक विजय कहलाता है*
*🌺 दशहरे के दिन जपा जाने वाला विजयी अचूक कारगर मंत्र -दशहरे की शाम के समय प्रत्येक व्यक्ति को*
*♦(ॐ अपराजितायै नमः )*
*⭐मंत्र की 1,2,5,7 या 9 मालाओं का जाप करना चाहिए इससे किसी भी कार्य में विजय प्राप्त होती है मुकदमा जीत विवाह शादी एवं किसी भी कार्य में व्यक्ति की हार नहीं होती है यह अत्यंत अचूक मंत्र है*
*🔥अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजय दशमी या दशहरे के नाम से मनाया जाता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये इस दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा*

*🌟इसी दिन लोग नया कार्य प्रारम्भ करते हैं, शस्त्र-पूजा की जाती है। प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं। रामलीला का आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है, शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है*




*🌺दशहरे का महत्व*
*🌷भारत कृषि प्रधान देश है इसलिए जब किसान अपने खेत में सुनहरी फसल उगाकर अनाज रूपी संपत्ति घर लाता है तो उसके उल्लास और उमंग का पारावार नहीं रहता। इस प्रसन्नता के अवसर पर वह भगवान की कृपा को मानता है और उसे प्रकट करने के लिए वह उसका पूजन करता है। समस्त भारतवर्ष में यह पर्व विभिन्न प्रदेशों में विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इस अवसर पर सिलंगण के नाम से सामाजिक महोत्सव के रूप में भी इसको मनाया जाता है। सायंकाल के समय पर सभी ग्रामीणजन सुंदर-सुंदर नव वस्त्रों से सुसज्जित होकर गाँव की सीमा पार कर शमी वृक्ष के पत्तों के रूप में ‘स्वर्ण’ लूटकर अपने ग्राम में वापस आते हैं। फिर उस स्वर्ण का परस्पर आदान-प्रदान किया जाता है*

*🏵विजय पर्व के रूप में दशहरा*
*🍁दशहरे का उत्सव शक्ति और शक्ति का समन्वय बताने वाला उत्सव है। नवरात्रि के नौ दिन जगदम्बा की उपासना करके शक्तिशाली बना हुआ मनुष्य विजय प्राप्ति के लिए तत्पर रहता है। इस दृष्टि से दशहरे अर्थात विजय के लिए प्रस्थान का उत्सव का उत्सव आवश्यक भी है*

*🌸भारतीय संस्कृति सदा से ही वीरता व शौर्य की समर्थक रही है। प्रत्येक व्यक्ति और समाज के रुधिर में वीरता का प्रादुर्भाव हो कारण से ही दशहरे का उत्सव मनाया जाता है। यदि कभी युद्ध अनिवार्य ही हो तब शत्रु के आक्रमण की प्रतीक्षा ना कर उस पर हमला कर उसका पराभव करना ही कुशल राजनीति है। भगवान राम के समय से यह दिन विजय प्रस्थान का प्रतीक निश्चित है। भगवान राम ने रावण से युद्ध हेतु इसी दिन प्रस्थान किया था। मराठा रत्न शिवाजी ने भी औरंगजेब के विरुद्ध इसी दिन प्रस्थान करके हिन्दू धर्म का रक्षण किया था। भारतीय इतिहास में अनेक उदाहरण हैं जब हिन्दू राजा इस दिन विजय-प्रस्थान करते थे*

*💥इस पर्व को भगवती के ‘विजया’ नाम पर भी ‘विजयादशमी’ कहते हैं। इस दिन भगवान रामचंद्र चौदह वर्ष का वनवास भोगकर तथा रावण का वध कर अयोध्या पहुँचे थे। इसलिए भी इस पर्व को ‘विजयादशमी’ कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि आश्विन शुक्ल दशमी को तारा उदय होने के समय ‘विजय’ नामक मुहूर्त होता है। यह काल सर्वकार्य सिद्धिदायक होता है। इसलिए भी इसे विजयादशमी कहते हैं*

*🌺ऐसा माना गया है कि शत्रु पर विजय पाने के लिए इसी समय प्रस्थान करना चाहिए। इस दिन श्रवण नक्षत्र का योग और भी अधिक शुभ माना गया है। युद्ध करने का प्रसंग न होने पर भी इस काल में राजाओं (महत्त्वपूर्ण पदों पर पदासीन लोग) को सीमा का उल्लंघन करना चाहिए। दुर्योधन ने पांडवों को जुए में पराजित करके बारह वर्ष के वनवास के साथ तेरहवें वर्ष में अज्ञातवास की शर्त दी थी। तेरहवें वर्ष यदि उनका पता लग जाता तो उन्हें पुनः बारह वर्ष का वनवास भोगना पड़ता। इसी अज्ञातवास में अर्जुन ने अपना धनुष एक शमी वृक्ष पर रखा था तथा स्वयं वृहन्नला वेश में राजा विराट के यहँ नौकरी कर ली थी। जब गोरक्षा के लिए विराट के पुत्र धृष्टद्युम्न ने अर्जुन को अपने साथ लिया, तब अर्जुन ने शमी वृक्ष पर से अपने हथियार उठाकर शत्रुओं पर विजय प्राप्त की थी। विजयादशमी के दिन भगवान रामचंद्रजी के लंका पर चढ़ाई करने के लिए प्रस्थान करते समय शमी वृक्ष ने भगवान की विजय का उद्घोष किया था।विजयकाल में शमी पूजन इसीलिए होता है*

*🌻दशहरे पर करने के कुछ विशेष उपाय*
*💥दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन बहुत ही शुभ होता है। माना जाता है कि इस दिन यह पक्षी दिखे तो आने वाला साल खुशहाल होता है*
*💥 दशहरा के दिन शमी के वृक्ष की पूजा करें। अगर संभव हो तो इस दिन अपने घर में शमी के पेड़ लगाएं और नियमित दीप दिखाएं। मान्यता है कि दशहरा के दिन कुबेर ने राजा रघु को स्वर्ण मुद्राएं देने के लिए शमी के पत्तों को सोने का बना दिया था। तभी से शमी को सोना देने वाला पेड़ माना जाता है*




*💥रावण दहन के बाद बची हुई लकड़ियां मिल जाए तो उसे घर में लाकर कहीं सुरक्षित रख दें। इससे नकारात्मक शक्‍तियों का घर में प्रवेश नहीं होता है*
*💥दशहरे के दिन लाल रंग के नए कपड़े या रुमाल से मां दुर्गा के चरणों को पोंछ कर इन्‍हें तिजोरी या अलमारी में रख दें। इससे घर में बरकत बनी रहती है*
*🏵प्रसिद्ध (ज्योतिषाचार्य)परमपूज्य गुरूदेव पंडित ह्रदय रंजन शर्मा (अध्यक्ष )श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सराफा बाजार अलीगढ़ यूपी व्हाट्सएप नंबर-9756502981,7500048250*

धर्म अध्यात्म Tags:Dashara, Vijay dashmi

Post navigation

Previous Post: जय नारायण विद्या मंदिर की छात्रा सुविज्ञा कुशवाहा ने टेबल टेनिस में फिर रचा इतिहास, हुआ राष्ट्रीय चयन
Next Post: करवाचौथ के प्रसिद्ध गीत, Famous songs of Karva Chauth

Related Posts

  • lunar eclipse
    Ganesh Chaturdashi ke shubh yog : इस बार चार शुभ योगों में मनाई जाएगी श्री गणेश चतुर्दशी धर्म अध्यात्म
  • Navratri 2023
    Shardiya Navratri 2023 : शरद नवरात्रि कब से कब तक है, कब किसकी करें पूजा, जानें विस्तार से धर्म अध्यात्म
  • Hartalika Teej
    Ganga Dussehra 2024 : हिन्दू धर्म मे माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है गंगा दशहरा धर्म अध्यात्म
  • Hariyali Teej
    Hariyali Teej 2025 : हरियाली तीज 27 को, जानें इस त्योहार में क्या होता है खास धर्म अध्यात्म
  • Makar Sankranti 2026
    Shardiya Navaratri : नौ ग्रहों को नियंत्रित करते हैं मां दुर्गा के नौ स्वरूप धर्म अध्यात्म
  • Lohri-2026
    Sri Hanuman Jayanti: श्री हनुमान जन्मोत्सव की पूजा विधि जानें पंडित हृदय रंजन शर्मा जी से धर्म अध्यात्म

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • रामोत्सव 2024
    रामोत्सव 2024 : उपेक्षित अयोध्या के दिन गये, यह भाग्योदय वाली श्रीराम की नगरी है धर्म अध्यात्म
  • बैडमिंटन टूर्नामेंट
    कॉस्को अंडर 13 व 17 बैडमिंटन टूर्नामेंट 30 जुलाई से रागेंद्र स्वरूप स्पोर्ट्स अकादमी में Sports
  • Tips of Health
    Tips of Health : स्वस्थ शरीर ही असली धन : फरहीन Blog
  • हरतालिका तीज व्रत (गौरी तृतीया व्रत) 26 अगस्त 2025 दिन मंगलवार को है, जानें चमत्कारी उपाय धर्म अध्यात्म
  • Tejas, Road ART
    Tejas, Road ART : दुर्घटना राहत गाड़ी तेजस, रोड एआरटी का शुभारंभ Railway
  • लखनवी अंदाज में “चार चांद”लगा देती है साड़ी : अहाना मिश्रा मनोरंजन
  • लालकुआँ-अमृतसर साप्ताहिक एक्सप्रेस
    Railway Update : लालकुआँ-अमृतसर साप्ताहिक एक्सप्रेस का शुभारंभ, स्थानीय जनता और व्यापारियों में खासा हर्ष Railway
  • Kharmas
    Kharmas 16 December : खरमास 16 दिसंबर से 14 जनवरी तक रहेगा, क्‍यों निषेध रहते हैं मांगलि‍क कार्य, जानें पं हृदय रंजन शर्मा जी से धर्म अध्यात्म

Copyright © 2026 .

Powered by PressBook News WordPress theme