Skip to content

The Xpress News

  • Home
  • धर्म अध्यात्म
  • Health
  • Blog
  • Toggle search form
  • Hartalika Teej
    महाशिवरात्रि पर शुभ योग, जानें चारों प्रहर का मुहूर्त, होगी भोलेनाथ की कृपा धर्म अध्यात्म
  • State Bodybuilding Championship
    State Bodybuilding Championship : सलमान, विकास, दिशा और सलोनी ने जीते पदक Sports
  • Indian Railways
    Indian Railways : पांच साल की उम्र में महज 12 घंटे में कानपुर से दिल्ली जाकर लौटा, अनोखा रिकॉर्ड Blog
  • करवा चौथ का मुहूर्त
    Ganesh Chaturthi 2025 : इस बार गणेश चतुर्थी पर बन रहे हैं कई शुभ योग धर्म अध्यात्म
  • Dengue : त्योहार पर चुपके से डेंगू ने दी दस्तक : दीपिका शुक्ला Health
  • आगरा में आयोजित यूपी कप टेबल टेनिस टूर्नामेंट में कानपुर का शानदार प्रदर्शन Sports
  • ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन अलीगढ़
    पत्रकारों की बढ़ाई जाए सुविधाएं, सीएम को भेजी मांगे General
  • Ashtami Fast
    Dhanteras : जानें सौभाग्य प्राप्ति के असरदार उपाय धर्म अध्यात्म
Skandamata Fifth Day

Skandamata Fifth Day : पंचम स्कंदमाता. 23 मार्च 2026 दिन सोमवार

Posted on March 21, 2026March 22, 2026 By Manish Srivastava No Comments on Skandamata Fifth Day : पंचम स्कंदमाता. 23 मार्च 2026 दिन सोमवार

अलीगढ़ (Skandamata Fifth Day )। चैत्र शुक्लपक्ष ,पंचमी दिन सोमवार कृतिका नक्षत्र विष्कुम्भ योग और बव करण के शुभ संयोग मै 23 मार्च 2026 को देवी मॉदुर्गा जी के पांचवे स्वरुप स्कंदमाता की पूजा घर घर होगी तोआइए माता की पूजा पाठ और माता के विषय मै विस्तृत जानकारी दे रहे हैं प्रसिद्ध(ज्योतिषाचार्य )परमपूज्य गुरुदेव पंडित ह्रदय रंजन शर्मा (अध्यक्ष )श्री गुरु ज्योतिष संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़।

💥माता का चोला (पीले रंग का ), शुभ रंग (सफेद), भोग (केला दान करने से शरीर स्वच्छ और सुंदर बनता है)

🌺मां दुर्गा जी के पांचवे स्वरुप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। इनकी उपासना नवरात्र के पांचवे दिन की जाती है। भगवान स्कंद कुमार कार्तिकेय नाम से भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राम मैं देवताओं के सेनापति भीबने थे देवी भगवती का पांचवा स्वरूप नारी शक्ति और मातृशक्ति का सजीव चरित्र है। स्कंद कुमार की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा, वह गणेश जी की भी माता है गणेश जी मानस पुत्र हैं और कार्तिकेय जी गर्भ से उत्पन्न हुए तारकासुर को वरदान था कि वह शंकर जी के शुक्रसे उत्पन्न पुत्र द्वारा ही मृत्यु को प्राप्त हो सकता है। इसी कारण देवी पार्वती जी का शंकर जी से मंगल परिणय हुआ इससेही प्रभु कार्तिकेय पैदा हुए औरअसुर तारकासुर का वध हुआ कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण पद्मासना देवी भी कहा जाता है।




मां स्कंदमाता की उपासना से बालरूप स्कंद भगवान कार्तिकेय की उपासना स्वयमेव हो जाती है। यह विशेषता केवल इन्हीं को प्राप्त है। अतः साधक को स्कंदमाता की उपासना की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए शंकर पार्वती के मांगलिक मिलन को सनातन धर्म संस्कृति मवें विवाह परंपरा का प्रारंभ माना गयाहै. कन्यादान, गर्भधारण इन सभी की उत्पत्ति शिव और पार्वती के प्रसंगों उपरांत हुई नवरात्र के पांचवे दिन का शास्त्रों में पुष्कल(बहुत)महत्व बताया गया है इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में स्थित होता है।

💥मोक्ष प्रदाता है मां स्कंदमाता-

🌸 पौराणिक मान्यता अनुसार देवी का यह रूप इच्छा, ज्ञान और क्रिया शक्ति का समागम है। जब ब्रह्मांड में व्याप्त शिव तत्व का मिलन त्रिशक्ति के साथ होता है तो स्कंद का जन्म होता है। नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना करने से भक्त अपने व्यवहारिक ज्ञान को कर्म में परिवर्तित करते हैं। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार देवी का यह रूप इच्छाशक्ति ,ज्ञान शक्ति और क्रिया शक्ति का समागम है। जब ब्रह्मांड में व्याप्त शिव तत्व का मिलन त्रिशक्ति के साथ होता है तो प्रभु स्कंध का जन्म होता है स्कंदमाता ज्ञान और क्रिया के स्रोत आरंभ का प्रतीक मानी गई है। जातक को सही दिशा का ज्ञान न होने के कारण वह विफल हो जाता है। मां स्कंदमाता की आराधना करने वाले को भगवती जीवन में सही दिशा ज्ञान का उपयोग कर उचित कर्मों द्वारा सफलता सिद्धि प्रदान करती हैं। योगीजन इस दिन विशुद्ध चक्र में अपना मन एकाग्र करते हैं। यही चक्र प्राणियों मे स्कंदमाता का स्थान है स्कंदमाता का विग्रह चार भुजाओं वाला है यह अपनी गोद में भगवान स्कंद को बैठाए रखती हैं।

दाहिनी ओर की ऊपर वाली भुजा से धनुष बाण धारी छहमुख वाले (षडानन) बाल रूप स्कंद को पकड़े रहती हैं। जबकि बाईं ओर की ऊपर वाली भुजा आशीर्वाद और बर प्रदाता मुद्रा में रखती हैं नीचे वाली दोनों भुजाओं में माता कमल पुष्प रखती हैं इनका वर्ण पूर्ण पूरी तरह निर्मल कांति वाला सफेद है यह कमल आसन पर विराजती हैं वाहन के रूप में इन्होंने सिह को अपनाया है कमल आसन वाली स्कंदमाता को “पद्मासना” भी कहा जाता है। यह वात्सल्य विग्रह है अतः कोई शस्त्र ये धारण नहीं करती इनकी कांति का अलौकिक प्रभामंडल इनके उपासक को भी मिलता है इनकी उपासना से साधक को परम शन्ति और सुख मिलता है उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होजाती और वह विशुद्ध चैतन्य स्वरूप की ओर बढ़ता है जातक की कोई लौकिक कामना शेष नहीं रहती है।




♦पौराणिक मंत्र ♦

🌲”या देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण संस्थिता! “नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यैनमो नमः”

🍁 प्रसिद्द (ज्योतिषाचार्य) परमपूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा (अध्यक्ष )श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी WhatsApp नंबर-9756402981,7500048250

धर्म अध्यात्म Tags:Skandamata Fifth Day

Post navigation

Previous Post: Kushmanda Devi 4 : मां दुर्गा के चौथे स्वरुप का नाम कूष्मांडा है, जानें महिमा
Next Post: Ashtami Fast : अष्टमी के लिए कब रखेंगे व्रत जानें

Related Posts

  • Ashtami Fast
    Vedic Raksha bandhan : जानें वैदिक रक्षा सूत्र बनाने की विधि, पांच वस्तुओं का महत्त्व व राखी मंत्र धर्म अध्यात्म
  • तृतीय चंद्रघंटा
    नरसिंह द्वादशी, व्रत-कथा, महत्व, पूजा और व्रत की विधि धर्म अध्यात्म
  • Kharmas
    Narad Jayanti : ब्रह्माण्ड के प्रथम संवाददाता की महर्षि नारद जयन्ती 25 मई को धर्म अध्यात्म
  • Shri Hanuman Jayanti
    Shri Hanuman Jayanti : हनुमान जन्मोत्सव 12 अप्रैल को, जब हनुमान जी गए शिक्षा ग्रहण करने धर्म अध्यात्म
  • Hariyali Teej
    Shri Hanuman Janmotsav : श्री हनुमान जन्मोत्सव 23 अप्रैल को, जानें मुहूर्त और सावधानियां धर्म अध्यात्म
  • करवा चौथ का मुहूर्त
    Durga Ashtami -2025 : दुर्गा अष्टमी को होगी माता महागौरी की पूजा, जानें पूजा विधि व मुहूर्त धर्म अध्यात्म

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Famous songs of Karva Chauth
    Magh Gupta Navratri : माघ गुप्त नवरात्रि 10 से 18 फरवरी तक, जानें पूजा विधि कथा व मुहूर्त धर्म अध्यात्म
  • ब्रह्मचारिणी
    Shri Kaal Bhairav Ashtami : काल भैरव की पूजा से नहीं सताता भय Blog
  • परी
    सपनों की उड़ान भरने को तैयार “परी” Motivation
  • IPL-2025 : लेंथ पर नियंत्रण और विविधतापूर्ण गेंदबाजी से खतरनाक बन जाता है दिग्वेश: वाटसन Sports
  • Badminton Competition
    Badminton Competition : आरल द्विवेदी ने पांच, आयुष कुमार, शार्दुल ने जीते चार खिताब Sports
  • रथ सप्तमी
    सूर्य नमस्कार के माध्यम से भव्य रूप से रथ सप्तमी मनाएगी क्रीड़ा भारती, देखें वीडियो Education
  • गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई को : कौन हो सकता है गुरु, जाने pt. हृदयरंज शर्मा जाने से धर्म अध्यात्म
  • तृतीय चंद्रघंटा
    नरसिंह द्वादशी, व्रत-कथा, महत्व, पूजा और व्रत की विधि धर्म अध्यात्म

Copyright © 2026 .

Powered by PressBook News WordPress theme