Skip to content

The Xpress News

  • Home
  • धर्म अध्यात्म
  • Health
  • Blog
  • Toggle search form
  • Skandamata Fifth Day
    Chaitra Navratri 2026 : इस बार पूरे 09 दिन के ही होंगे चैत्रनवरात्र धर्म अध्यात्म
  • Malaysian Open
    Malaysian Open : सिंधु मलेशिया ओपन के सेमीफाइनल में, सात्विक और चिराग हारे Sports
  • ब्रह्मचारिणी
    Mahakal Bhairav Ashtami 2023 : भगवान शंकर का पूर्ण रूप है काल भैरव, जानें विस्तार से धर्म अध्यात्म
  • Haryana Textile Industry : उत्तर प्रदेश में शिफ्ट होगी हरियाणा की टेक्सटाइल इंडस्ट्री UP Government News
  • जय नारायण विद्या मंदिर
    जय नारायण विद्या मंदिर में कबड्डी टूर्नामेंट सम्पन्न : सीनियर वर्ग में प्रताप हाउस विजेता, जूनियर में केशव हाउस ने मारी बाजी Sports
  • Atal Bihari's birth anniversary
    Atal Bihari’s birth anniversary : अस्थिर सरकारों ने देश को किया खोखला, अटल जी ने दी स्थिर सरकार: सीएम योगी Politics
  • Kanpur Polytechnic
    Kanpur Polytechnic : पाॅलीटेक्निक छात्र नौकरी देने वाले बनें, न कि लेने वाले Education
  • प्रणव अग्रवाल, राघव जिंदल, और तनुवीर जयचांग ने किया स्टेट शूटिंग कंपटीशन क्वालीफाई Sports
Shri Hanuman Jayanti

Shri Hanuman Jayanti : हनुमान जन्मोत्सव 12 अप्रैल को, जब हनुमान जी गए शिक्षा ग्रहण करने

Posted on April 7, 2025April 7, 2025 By Manish Srivastava No Comments on Shri Hanuman Jayanti : हनुमान जन्मोत्सव 12 अप्रैल को, जब हनुमान जी गए शिक्षा ग्रहण करने

12 अप्रैल दिन शनिवार श्री हनुमान जन्मोत्सव (Shri Hanuman Jayanti) विशेष,सूर्य देव कैसे बने श्रीहनुमान जी के गुरुतो आइए आज आपको इस विषय पर विस्तृत जानकारी दे रहे हैं श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भण्डार वाले प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा.9756402981,7500048250

शिक्षा ग्रहण करने के लिए हनुमान जी को माता अंजनादेवी ने किसके पास भेजा
भगवान हनुमानजी जिनसे सभी बल, बुद्धि,बिद्या देने की कामना करते हैं। हनुमानजी की शिक्षा के लिए उनकी माता कितनी चिंतित थी ये तो उनका इतिहास पढ़ने से ही पता चलता है। कई एसी पौराणिक कथाएं है जिनसे हम उनके बारे में पढ़ सकते हैं। जैसे माता अखिल ब्रह्माण्ड की अदम्य शक्ति स्वरूपा होती है। समग्र सृष्टि का स्वरूप माता की गोद में ही अंकुरित, पल्लवित, पुष्पित एवं विकसित होता है। विश्व का उज्ज्वल भविष्य माता के स्नेहांचल में ही फूलता-फलता है। यदि कहा जाए कि निखिल संसार की सर्जना-शक्ति माता है, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

बालक जन्म से पूर्व गर्भ में ही माता से संस्कार ग्रहण करने लग जाता है और जन्म के बाद वह माता के संस्कार का अनुगामी हो जाता है। बालक के बचपन का अधिकांश समय माता की वात्सल्यमयी छाया में ही व्यतीत होता है। करणीय-अनुकरणीय, उचित-अनुचित, हित-अहित सभी संस्कारों का प्रथमाक्षर वह माता से ही सीखता है।

सन्तान के चरित्र-निर्माण में माता की भूमिका आधारशिलास्वरूप है इसीलिए महीयसी “माता को प्रथम गुरु” का सम्मान दिया गया है। अंजनादेवी परम सदाचारिणी, तपस्विनी एवं सद्गुण-सम्पन्न आदर्श माता थीं। वे अपने पुत्र श्रीहनुमानजी को श्लाघनीय तत्परता से आदर्श बालक का स्वरूम प्रदान करने की दिशा में सतत जगत और सचेष्ट रहती थीं। पूजनोपरान्त और रात्रि में शयन के पूर्व वे अपने प्राणाधिक प्रिय पुत्र को पुराणों की प्रेरणाप्रद कथाएं सुनाया करतीं थीं। वे आदर्श पुरुषों के चरित्र श्रीहनुमानजी को पुनः-पुनः सुनातीं और अपने पुत्र का ध्यान उनकी ओर आकृष्ट करती रहतीं।




माता अंजनादेवी जब भगवान् श्रीरामजी के अवतार की कथा सुनाना प्रारम्भ करतीं, तब बालक श्रीहनुमानजी का सम्पूर्ण ध्यान उक्त कथा में ही केन्द्रित हो जाता। निद्रा एवं क्षुधा उनके लिए कोई अर्थ नहीं रखतीं। सहजानुराग से श्रीहनुमानजी पुनः-पुनः श्रीराम-कथा का श्रवण करते और खो जाते । माता को चिंता सताने लगी। श्री हनुमानजी की आयु भी विद्याध्ययन के योग्य हो गई थी। माता अंजनीदेवी एवं वानरराज केसरी ने विचार किया- ‘अब हनुमान को विद्यार्जन के निमित्त किसी योग्य गुरु के हाथ सौंपना ही होगा। अतएव माता अंजना और कपीश्वर केसरी ने श्रीहनुमानजी को ज्ञानोपलब्धि के लिए गुरु-गृह भेजने का निर्णय किया।

अपार उल्लास के साथ माता-पिता ने अपने प्रिय श्रीहनुमानजी का उपनयन-संस्कार कराया और उन्हें विद्यार्जन के लिए गुरु-चरणों की शरण में जाने का स्नेहिल आदेश किया, पर समस्या यह थी कि श्रीहनुमानजी किस सर्वगुण-सम्पन्न आदर्श गुरु का शिष्यत्व अंगीकृत करें। माता अंजना ने प्रेमल स्वर में कहा- ‘‘पुत्र ! सभी देवताओं में आदि देव भगवान् भास्कर को ही कहा जाता है और फिर, सकलशास्त्रमर्मज्ञ भगवान् सूर्यदेव तुम्हें समय पर विद्याध्ययन कराने का कृपापूर्ण आश्वासन भी तो दे चुके हैं। अतएव, तुम उन्हीं के शरणागत होकर श्रद्धा-भक्तिपूर्वक शिक्षार्जन करो।’’

श्रीहनुमानजी माता-पिता के श्रीचरणों में अपने प्रणाम सादर निवेदित कर आकाश में उछले तो सामने “सूर्यदेव के सारथि अरुण” मिले। श्रीहनुमानजी ने पिता का नाम लेकर अपना परिचय दिया और अरुण ने उन्हें अंशुमाली के पास जाने को कहा। आंजनेय ने अतीव श्रद्धापूर्वक भगवान् सूर्यदेव के चरणों का स्पर्श करते हुए उन्हें अपना हार्दिक नमन निवेदित किया।

विनीत श्रीहनुमानजी को बंद्धाजलि खड़े देख भगवान् भुवनभास्कर ने स्नेहिल शब्दों में पूछा- ‘बेटा ! आगमन का प्रयोजन कहो।’ श्रीहनुमानजी ने विनम्र स्वर में निवेदन किया- ‘प्रभो ! मेरा यज्ञोपवीत संस्कार सम्पन्न हो जाने पर माता ने मुझे आपके चरणों में विद्यार्जन के लिए भेजा है। आप कृपापूर्वक मुझे ज्ञानदान कीजिए।’ सूर्यदेव बोले- ‘‘बेटा ! मुझे तुम्हें अपना शिष्य बनाने में अमित प्रसन्नता होगी, पर तुम तो मेरी स्थिति देखते ही हो। मैं तो अहर्निश अपने रथ पर सवार दौड़ता रहता हू। सूर्यदेव की बात सुनकर पवनात्मज बोले-‘प्रभो ! वेगपूर्वक चलता आपका रथ कहीं से भी मेरे अध्ययन को बाध्त नहीं कर सकेगा। हां आपको किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। मैं आपके सम्मुख रथ के वेग के साथ ही आगे बढ़ता रहंगा।’

श्रीहनुमानजी सूर्यदेव की ओर मुख करके उनके आगे-आगे स्वभाविक रूप में चल रहे थे।

भानुसों पढ़न हनुमान गए भानु मन, अनुमानि सिसुकेलि कियो फेरफार सो।
पाछिले पगनि गम गगन मगन-मन, क्रम को न भ्रम, कपि बालक-बिहार सो।।




सूर्यदेव को ये देख हैरानी नहीं हुई क्योंकि वे जानते थे कि हनुमानजी खुद बुद्धिमान हैं लेकिन प्रथा के अनुसार गुरु द्वारा शिक्षा गृहण करना जरुरी है इसलिए सूर्यदेव ने कुछ ही दिनों में उन्हें कई विद्याएं सिखा दी जिससे वे विद्वान कहलाएं।

🌞 प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भण्डार वाले पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी व्हाट्सएप नंबर-9756402981,7500048250

धर्म अध्यात्म Tags:Shri Hanuman Jayanti

Post navigation

Previous Post: Kamada Ekadashi Vrat : पंडित हृदयरंजन शर्मा से जाने कामदा एकादशी व्रत का महत्व
Next Post: Sri Hanuman Jayanti: श्री हनुमान जन्मोत्सव की पूजा विधि जानें पंडित हृदय रंजन शर्मा जी से

Related Posts

  • Chhoti Diwali
    Chhoti Diwali : छोटी दिवाली को ऐसे करें काली पूजा, होगा चमत्कार धर्म अध्यात्म
  • Hartalika Teej
    Hartalika Teej 2024 : हरतालिका तीज की व्रत विधि, मंत्र, मुहूत और पूजन सामग्री धर्म अध्यात्म
  • Ganesha and Lakshmi Pooja : आखिर क्यों की जाती है गणेश-लक्ष्‍मी की पूजा एक साथ धर्म अध्यात्म
  • करवा चौथ
    करवा चौथ के साथ ही त्योहारों की खुशियों का आगाज धर्म अध्यात्म
  • Skandamata Fifth Day
    होलिका परिक्रमा का मंत्र कौन सा है किस प्रकार से हमे होली की पूजा-पाठ करनी चाहिए धर्म अध्यात्म
  • Ashtami Fast
    Makar Sankranti 2025 : मकर संक्रांति पर दिया गया दान बढ़कर पुनः प्राप्त होता है 100 गुना धर्म अध्यात्म

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • ओम बिरला
    सदन जितना अधिक चलेगा, लोकतंत्र उतना ही होगा मजबूत- ओम बिरला General
  • Hariyali Teej
    Hariyali Teej 2025 : हरियाली तीज 27 को, जानें इस त्योहार में क्या होता है खास धर्म अध्यात्म
  • प्रेक्षा तिवारी ,सुविज्ञा कुशवाहा
    District Table Tennis Championship : प्रेक्षा तिवारी ने तिहरा और सुविज्ञा, तारिणी, आशुतोष, दक्ष  ने जीता दोहरा खिताब Sports
  • डॉक्टर मधुलिका शुक्ला
    स्वस्थ शरीर ही सबसे बड़ी पूंजी: डॉक्टर मधुलिका शुक्ला Health
  • योगी सरकार की सुपोषण पहल: 2026-27 तक उत्तर प्रदेश में 347 नई टीएचआर इकाइयां स्थापित होंगी Blog
  • Ashtami Fast
    Shri Hanuman Janmotsav : बजरंगबली के किस उपाय से मिलता है क्या लाभ, जानें विस्तार से धर्म अध्यात्म
  • बैडमिंटन
    इरशाद अहमद को बैडमिंटन रेफरी परीक्षा में सफलता, कानपुर को मिला गौरव Sports
  • साढ़े चार हजार विद्यार्थियों को मिलेगा स्मार्टफोन व टैबलेट का उपहार Blog

Copyright © 2026 .

Powered by PressBook News WordPress theme