- -86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ने अनुशासन व जवाबदेही पर दिया जोर
– पीठासीन अधिकारियों को दलगत राजनीति से ऊपर होने की दी सलाह
लखनऊ: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि विधायिका लोकतंत्र का वह मंच है, जहां जनता की आवाज शासन तक पहुंचती है, समाधान का रास्ता निकलता है। ऐसे में राज्य विधानमंडलों की कार्यवाही का घटता समय लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। राज्य विधानसभाओं की कार्यवाही के लिए एक निश्चित और पर्याप्त समय सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही अधिक सार्थक, गंभीर और परिणामोन्मुख चर्चा संभव होगी।
ओम बिरला सोमवार को विधानसभा में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि यह भी कहा कि पीठासीन अधिकारी चाहे जिस भी राजनीतिक दल से आते हों, उनका आचरण दलगत राजनीति से हटकर पूर्णतः न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और संतुलित होना चाहिए। पीठासीन अधिकारी का व्यवहार केवल निष्पक्ष होना ही नहीं चाहिए, बल्कि निष्पक्ष दिखना भी चाहिए, ताकि सदन की गरिमा और जनता का विश्वास बना रहे।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के इस दौर में जनप्रतिनिधियों के प्रत्येक आचरण पर जनता की सतत निगाह रहती है। ऐसे में संसदीय शिष्टाचार, अनुशासन और सदन की प्रामाणिकता बनाए रखना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना केवल नियमों से नहीं, बल्कि व्यवहार और परंपराओं के पालन से संभव है। सम्मेलन में 28 राज्यों, तीन केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं व छह विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारियों ने भाग लिया। यूपी प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सम्मेलन में शामिल सभी पीठासीन अधिकारियों के समक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुभकामना संदेश पढ़कर सुनाया।
