Skip to content

The Xpress News

  • Home
  • धर्म अध्यात्म
  • Health
  • Blog
  • Toggle search form
  • फेमस माडल
    फेमस माडल के साथ ब्यूटी मेकअप एक्सपर्ट भी हैं आरती पाल Motivation
  • गोमतीनगर-जयपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस
    गोमतीनगर-जयपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस कायमगंज स्टेशन पर रुकेगी, जानें समय Railway
  • कानपुर के अभिषेक सिंह और शिवम को UTT पैरा राष्ट्रीय टेबल टेनिस में कांस्य पदक Sports
  • Sansad Khel Spardha
    Sansad Khel Spardha : कानपुर में सांसद खेल स्पर्धा 19 व 20 फरवरी को ग्रीनपार्क में, करें आवेदन Sports
  • Skandamata Fifth Day
    Parshuram Birth Anniversary : भगवान परशुराम की जयंती 10 मई को, अपने शिष्य भीष्म को नहीं कर सके पराजित धर्म अध्यात्म
  • Bithoor to Kanpur Central Station
    Railway update : समस्तीपुर मंडल के मेहसी स्टेशन पर Railway
  • Surya Namaskar Week
    Surya Namaskar Week : सूर्य नमस्कार सप्ताह के चौथे दिन उत्साह पहुंचा चरम पर, देखें वीडियो Sports
  • Navratri 2023
    Sharad Navratri 2023 : शरद नवरात्रि कब से कब तक है ,कौन-कौन से दिन किस देवीमॉ के स्वरूप की पूजा करनी होगी, पढ़ें पूरी जानकारी Blog
कार्तिक पूर्णिमा

कार्तिक पूर्णिमा का जानें शुभ मुहूर्त, Know the auspicious time of Kartik Purnima

Posted on November 13, 2024 By Manish Srivastava No Comments on कार्तिक पूर्णिमा का जानें शुभ मुहूर्त, Know the auspicious time of Kartik Purnima

Aligarh : 15 नबम्बर 2024, शुक्रवार के दिन पूर्णिमा तिथि सुबह 06:19 से लग रही है जो 15 नवंबर दिन शुक्रवार की रात 02:58 तक पूर्णिमा तिथि मान्य रहेगी। अतः देव दीपावली 15 नबम्वर शुक्रवार और कार्तिकी पूर्णिमा का व्रत भी 15 नवंबर शुक्रवार को ही मान्य रहेगा।

कार्तिक पूर्णिमा, त्रिपुरारी पूर्णिमा, देव दीपावली के विषय पर बता रहे हैं प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार।
कार्तिक मास की पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली के त्रिपुरों का नाश किया था। त्रिपुरों का नाश करने के कारण ही भगवान शिव का एक नाम त्रिपुरारी भी प्रसिद्ध है। भगवान शिव ने कैसे किया त्रिपुरों का नाश, ये पूरी कथा इस प्रकार है।

ब्रह्माजी ने दिया था ये अनोखा वरदान शिवपुराण के अनुसार, दैत्य तारकासुर के तीन पुत्र थे- तारकाक्ष, कमलाक्ष वविद्युन्माली। जब भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर दिया तो उसके पुत्रों को बहुत दुःख हुआ। उन्होंने देवताओं से बदला लेने के लिए घोर तपस्या कर ब्रह्माजी को प्रसन्न कर लिया। जब ब्रह्माजी प्रकट हुए तो उन्होंने अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्माजी ने उन्हें इसके अलावा कोई दूसरा वरदान मांगने के लिए कहा
तब उन तीनों ने ब्रह्माजी से कहा कि- आप हमारे लिए तीन नगरों का निर्माण करवाईए।




हम इन नगरों में बैठकर सारी पृथ्वी पर आकाश मार्ग से घूमते रहें। एक हजार साल बाद हम एक जगह मिलें। उस समय जब हमारे तीनों पुर (नगर) मिलकर एक हो जाएं, तो जो देवता उन्हें एक ही बाण से नष्ट कर सके, वही हमारी मृत्यु का कारण हो। ब्रह्माजी ने उन्हें ये वरदान दे दिया। मयदानव ने किया था त्रिपुरों का निर्माणब्रह्माजी का वरदान पाकर तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली बहुत प्रसन्न हुए। ब्रह्माजी के कहने पर मयदानव ने उनके लिए तीन नगरों का निर्माण किया। उनमें से एक सोने का, एक चांदी का व एक लोहे का था।

सोने का नगर तारकाक्ष का था, चांदी का कमलाक्षका व लोहे का विद्युन्माली का।अपने पराक्रम से इन तीनों ने तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया।इन दैत्यों से घबराकर इंद्र आदि सभी देवता भगवान शंकर की शरण में गए। देवताओं की बात सुनकर भगवान शिव त्रिपुरों का नाश करने के लिए तैयार हो गए। विश्वकर्मा ने भगवान शिव के लिए एक दिव्य रथ का निर्माण किया

ऐसे हुआ त्रिपुरों का नाश
चंद्रमा व सूर्य उसके पहिए बने, इंद्र,वरुण, यम और कुबेर आदि लोकपाल उस रथ के घोड़े बने हिमालय धनुष बने और शेषनाग उसकी प्रत्यंचा स्वयं भगवान विष्णु बाण तथा अग्निदेव उसकी नोक बनेउस दिव्य रथ परसवार होकर जब भगवान शिव त्रिपुरों का नाश करने के लिए चले तो दैत्यों में हाहाकर मच गया।दैत्यों व देवताओं में भयंकर युद्ध छिड़ गया।जैसे ही त्रिपुर एक सीध में आए,भगवान शिव ने दिव्य बाण चलाकर उनका नाश कर दिया त्रिपुरों का नाश होते ही सभी देवता भगवान शिव की जय-जयकार करने लगे त्रिपुरों का अंत करने के लिए ही भगवान शिव को त्रिपुरारी भी कहते हैं


https://youtu.be/C9kHNb9oZ60

धर्म अध्यात्म

Post navigation

Previous Post: Kartik Purnima 2024 : कार्तिक पूर्णिमा को दान करने से मिलता है कई गुणा लाभ, Know the importance of Kartik Purnima
Next Post: Badminton Competition : अंतर विद्यालय बैडमिंटन प्रतियोगिता में जय नारायण विद्या मंदिर बना चैंपियन

Related Posts

  • Kharmas
    Hartalika Vrat : हर‍तालिका व्रत के विशेष सरल उपाय धर्म अध्यात्म
  • कानपुर
    कानपुर को अयोध्या और चित्रकूट की श्रेणी में स्थापित करने पर हुआ मंथन धर्म अध्यात्म
  • Chhoti Diwali
    Chhoti Diwali : छोटी दिवाली को ऐसे करें काली पूजा, होगा चमत्कार धर्म अध्यात्म
  • भड्डली नवमी
    भड्डली नवमी, देवशयनी से पहले इस साहलक का अंतिम अबूझ विवाह मुहूर्त जानें पं. हृदय रंजन शर्मा जी से धर्म अध्यात्म
  • Durga Navami
    Choti Diwali-2025 : छोटी दीपावली को ऐसे करें काली पूजा, होगा चमत्‍कार, जानें शुभ मुहूर्त Blog
  • ब्रह्मचारिणी
    Solar Eclipse : विदेश में कंकणाकृति खंड़ग्रास सूर्य ग्रहण 14 को दिखेगा धर्म अध्यात्म

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • लखनऊ के दमदार बॉडीबिल्डर पहुंचे कानपुर
    नवाबी शहर लखनऊ के दमदार बॉडीबिल्डर पहुंचे कानपुर Sports
  • बैडमिंटन प्रतियोगिता
    बैडमिंटन प्रतियोगिता में रागेन्द्र स्वरूप स्पोर्ट्स अकैडमी के खिलाड़ी छाये Sports
  • Ganesha and Lakshmi Pooja : आखिर क्यों की जाती है गणेश-लक्ष्‍मी की पूजा एक साथ धर्म अध्यात्म
  • Shri Krishna Janmashtami
    Shri Krishna Janmashtami : ग्वाल वालों ने मिलकर फोड़ी मटकी धर्म अध्यात्म
  • Fitness Model
    Fitness Model : अपने टैलेंट से फिटनेस मॉडलिंग में दिखाया ‘करिश्मा ‘ Sports
  • जयनारायण विद्या मंदिर में भावभीनी विदाई समारोह, मधुर स्मृतियों एवं स्वर्णिम सपनों से सजा विदाई समारोह–2026 Education
  • Tejas, Road ART
    Tejas, Road ART : दुर्घटना राहत गाड़ी तेजस, रोड एआरटी का शुभारंभ Railway
  • Bithoor to Kanpur Central Station
    Railway update : समस्तीपुर मंडल के मेहसी स्टेशन पर Railway

Copyright © 2026 .

Powered by PressBook News WordPress theme