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Makar Sankranti : 23 साल बाद एकादशी का शुभ संयोग बन रहा है मकर संक्रांति पर, जानें शुभ मुहूर्त

Posted on January 7, 2026 By Manish Srivastava No Comments on Makar Sankranti : 23 साल बाद एकादशी का शुभ संयोग बन रहा है मकर संक्रांति पर, जानें शुभ मुहूर्त

अलीगढ़।  बुधवार 14 जनवरी विशेष, आखिर हम क्यों मनाते हैं मकर संक्रांति (Makar Sankranti) आइएआज आपको इस विषय पर विस्तृत जानकारी दे रहे है प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भण्डार वाले पुरानी कोतवाली सराफा बाजार अलीगढ़ यूपी वाट्स अप नबर-9756402981,8272809774

🌻 मकर संक्रांति (Makar Sankranti) पर इस वर्ष 23 साल बाद एकादशी का शुभ संयोग बन रहा है

मकर संक्रांति पर करीब 23 साल बाद एकादशी का शुभ संयोग बन रहा है इस दिन षट्तिला एकादशी व्रत भी है संक्रांति और एकादशी का एक ही दिन पढ़ना आध्यात्मिक रूप से अक्षय पुण्य फल देने वाला माना जाता है ज्योतिषाचार्य पं.हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार इससे पहले मकर संक्रांति और एकादशी का शुभ संयोग वर्ष 2003 में बना था इसके अलावा इस बार मकर संक्रांति पर दो शुभ संयोग भी बन रहे हैं इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण होने जा रहा है जिससे दान पुण्य और पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है

🌞हमारे देश में मकर संक्रांति का त्यौहार विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नाम से मनाया जाता है। कहीं इसे मकर संक्रांति कहते हैं तो कहीं पोंगल लेकिन तमाम मान्यताओं के बाद इस त्यौहार को मनाने के पीछे का तर्क एक ही रहता है और वह है सूर्य की उपासना और दान। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना मकर-संक्रांति कहलाता है। संक्रांति के लगते ही सूर्य उत्तरायण हो जाता है। मान्यता है कि मकर-संक्रांति से सूर्य के उत्तरायण होने पर देवताओं का सूर्योदय होता है और दैत्यों का सूर्यास्त होने पर उनकी रात्रि प्रारंभ हो जाती है। उत्तरायण में दिन बड़े और रातें छोटी होती हैं। मकर संक्रांति को मनाने का प्रचलन कब से शुरू हुआ इसके बारे में किसी को सही जानकारी नहीं है, लेकिन इसके पीछे बहुत सी पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं जो इस पर्व को मनाने के महत्व को सत्यापित करती हैंउत्तर प्रदेश में यह मुख्य रूप से ‘दान का पर्व’ है।




इलाहाबाद में गंगा, यमुना व सरस्वती के संगम पर प्रत्येक वर्ष एक माह तक माघ मेला लगता है जिसे माघ मेले के नाम से जाना जाता है। माघ मेले का पहला स्नान मकर संक्रान्ति से शुरू होता है। मकर संक्रान्ति के दिन स्नान करने के बाद तिल के मिष्टान्न आदि को ब्राह्मणों व पूज्य व्यक्तियों को दान दिया जाता है। समूचे उत्तर प्रदेश में इस व्रत को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है तथा इस दिन खिचड़ी खाने एवं खिचड़ी दान देने का अत्यधिक महत्व होता है। बिहार में मकर संक्रान्ति को खिचड़ी नाम से जाना जाता है। इस दिन उड़द, चावल, तिल, चूड़ा, गौ, स्वर्ण, ऊनी वस्त्र, कम्बल आदि दान करने का महत्त्व है। महाराष्ट्र में इस दिन सभी विवाहित महिलाएँ अपनी पहली संक्रान्ति पर कपास, तेल व नमक आदि चीजें अन्य सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं। तिल-गूल नामक हलवे के बाँटने की प्रथा भी है। बंगाल में इस पर्व पर स्नान के पष्चात तिल दान करने की प्रथा है गंगा स्नान का महत्व मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान का काफी महत्व है।

गंगा स्नान के बारे में मान्यता है कि इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम प्रयाग में सभी देवी-देवता अपना स्वरूप बदलकर स्नान के लिए आते हैं। इसलिए इस दिन दान, तप, जप का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान करने से सभी कष्टों का निवारण हो जाता है। मकर संक्रांति में चावल, गुड़, उड़द, तिल आदि चीजों को खाने में शामिल किया जाता है, क्योंकि यह पौष्टिक होने के साथ ही शरीर को गर्म रखने वाले होते हैं। इस दिन ब्राह्मणों को अनाज, वस्त्र, ऊनी कपड़े, फल आदि दान करने से शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। दीर्घायु एवं निरोगी रहने के लिए रोगी को इस दिन औषधि, तेल, आहार दान करना चाहिए

🌺इस वर्ष 2026 में यह त्यौहार 14 जनवरी बुधवार को है क्योंकि इस बार धनु राशि से मकर राशि में सूर्य का प्रवेश 14जनवरी की दोपहर 03:07 पर हो रहा है। अतः मकर संक्रांति 14 जनवरी दिन बुधवार को मनाना ही सर्वोत्तम माना जाएगा इसी दिन पूरे दिन गंगा स्नान एवं दान पुण्य हेतु पुण्य काल माना जाएगा मकर संक्रान्ति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ होती है। इसलिये इस पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं। तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं 14 जनवरी यानी मकर संक्रान्ति से पृथ्वी पर अच्छे दिनों की शुरुआत होती है। माघ मेले का पहला स्नान मकर संक्रान्ति से शुरू होकर शिवरात्रि के आख़िरी स्नान तक चलता है मकर संक्रान्ति का महत्व,शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है।




इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इसदिन गुड़ तिल से बने हुए पदार्थ मूंगफली ऊनी कपड़े जूते चप्पल घरेलू उपयोग के समान शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। मकर संक्रान्ति से सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरू हो जाता है। अतइस दिन से रातें छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं तथा गरमी का मौसम शुरू हो जाता है। दिन बड़ा होने से प्रकाश अधिक होगा तथा रात्रि छोटी होने से अन्धकार कम होगा। अत: मकर संक्रान्ति पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है यह पर्व प्रतिवर्ष 14 जनवरी को ही पड़ता है इस बार सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में 14 जनवरी की दोपहर 03:07पर प्रवेश करेंगे इसलिए मकर संक्रांति का शुभ त्यौहार इस बार 14 जनवरी को ही मनाना उचित माना जाएगा इसी दिन लोग गंगा पर स्नान हेतु भी जाते हैं और दान पुण्य करते हैं जिससे पुण्य की प्राप्ति भी होती है।

🍁इस बार मकर संक्रांति पर महा पुण्य काल दोपहर 03:07 से सांयकाल 06:00 तक माना जाएगा।

🍁मकर संक्रांतिपुण्य काल दोपहर 03:07से सांयकाल 06:00 तक पूरे दिन मान्य होगा

🍁2026में सर्दियों के शुभ विवाह मुहूर्त*जनवरी में 23जनवरी वसंत पंचमी
🍁फरवरी में 3 ,4,5,10,13,15, 19फुलेरा दौज,20,21 फरवरी
🍁मार्चमें 06,09,10,11 और 12 मार्च




⭐प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भण्डार पुरानी कोतवाली सराफा बाजार अलीगढ़ यूपी व्हाट्सएप नंबर-9756402981,7500048250

Blog Tags:Makar Sankranti, पंडित हृदय रंजन शर्मा

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