Skip to content

The Xpress News

  • Home
  • धर्म अध्यात्म
  • Health
  • Blog
  • Toggle search form
  • द्वितीय कॉस्को कानपुर डिस्ट्रिक्ट बैडमिंटन चैंपियनशिप का उद्घाटन Sports
  • दिशा कुमारी
    कड़े संघर्ष के बाद ही मिलती है सफलता: दिशा Sports
  • होली
    विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को धर्म अध्यात्म
  • खेल दिवस सप्ताह
    खेल दिवस सप्ताह का उद्घाटन 28 को जयनारायण में Sports
  • डॉक्टर बदलने से नहीं उचित व नियमित इलाज से दूर होती है बीमारी : डॉक्टर मधुलिका शुक्ला Health
  • TSH Stag Global 3rd यूपी स्टेट रैंकिंग टेबल टेनिस टूर्नामेंट 14 से Sports
  • आईएमए कानपुर के डॉक्टरों को चम्पतराय ने समझाया जन्मभूमि विवाद का इतिहास, देखें वीडियो धर्म अध्यात्म
  • जय नारायण विद्या मंदिर
    जय नारायण विद्या मंदिर के विद्यार्थियों ने ली यातायात के नियम पालन की शपथ, देखें वीडियो Education

Rakshabandhan : रक्षाबन्धन पर्व बनाने की परम्परा कैसे शुरु हुई, जानें इतिहास एवं पूजा विधि!

Posted on August 9, 2024 By Manish Srivastava No Comments on Rakshabandhan : रक्षाबन्धन पर्व बनाने की परम्परा कैसे शुरु हुई, जानें इतिहास एवं पूजा विधि!

रक्षाबन्धन (Rakshabandhan) : 19 अगस्त दिन सोमवार विशेष


अलीगढ़ : रक्षाबन्धन पर्व, इतिहास एवं पूजा विधि! के विषय में विस्तृत जानकारी दे रहे हैं श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार वाले प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा व्हाट्सएप नंबर-9756402981,7500048250

♦️रक्षाबन्धन पर्व बनाने की परम्परा कैसे शुरु हुई ? राखी या रक्षासूत्र का प्राचीन स्वरूप क्या था ? रक्षाबन्धन पर क्यों की जाती है श्रवण कुमार की पूजा ?

♦️रक्षाबन्धन का पर्व श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है । इस पर्व को मनाने की परम्परा कैसे शुरु हुई, इस सम्बन्ध में एक कथा प्रचलित है—

♦️रक्षाबन्धन पर्व बनाने की परम्परा कैसे शुरु हुई ?
🏵️प्राचीनकाल में एक बार बारह वर्षों तक देवासुर-संग्राम होता रहा जिसमें देवताओं की हार हुई । असुरों ने स्वर्ग पर आधिपत्य कर लिया । दु:खी, पराजित और चिन्तित इन्द्र देवगुरु बृहस्पति के पास गये और शोकाकुल होकर बोले—

‘🏵️इस समय न तो मैं यहां ही सुरक्षित हूँ और न ही यहां से कहीं निकल ही सकता हूँ । ऐसी दशा में मेरा युद्ध करना ही अनिवार्य है, जबकि युद्ध में हमारी पराजय ही हुई है ।’

🏵️देवराज इन्द्र और देवगुरु बृहस्पति की सब बातें इन्द्राणी सुन रही थीं । उन्होंने इन्द्र से कहा—‘कल श्रावण शुक्ल पूर्णिमा है । मैं विधानपूर्वक रक्षासूत्र तैयार करुंगी, उसे आप स्वस्तिवाचनपूर्वक ब्राह्मणों से बंधवा लीजिएगा । इससे आप अवश्य विजयी होंगे ।’

🏵️दूसरे दिन इन्द्र ने रक्षाविधान और स्वस्तिवाचनपूर्वक रक्षाबन्धन कराया जिसके प्रभाव से इन्द्र की विजय हुई । तभी से रक्षाबन्धन का पर्व मनाया जाने लगा ।




♦️प्राचीनकाल में रक्षासूत्र कैसे बनाया जाता था ?

*🏵️एक सूती या रेशमी पीला वस्त्र लेकर उसमें पीली सरसों, सोना, केसर, चन्दन, अक्षत (चावल) और दूर्वा रखकर बांध लिया जाता था । फिर पृथ्वी लीप कर उस पर कलश स्थापना करके उस पर एक पात्र में रक्षासूत्र रखकर उसकी पूजा की जाती थी उसके बाद ब्राह्मण से रक्षासूत्र बंधवाया जाता था
♦️ पूर्णिमा तिथि प्रारंभ 18 अगस्त 2024 की रात्रि 3:04 से
♦️पूर्णता तिथि समाप्त 19 अगस्त 2024 की रात्रि 11:55 तक पूर्णिमा तिथि मान्य होगी
♦️भद्र इस दिन भद्रा दोपहर 1:29 तक रहेगी इसके पश्चात ही माताएं बहने अपने भाई के हाथों पर रक्षा सूत्र ,राखी बांध सकती हैं
♦️रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त 19 तारीख सोमवार की दोपहर 1:45 से 7:45 तक अति उत्तम समय माना जाएगा इस समय में चौघड़िया मुहूर्त के अनुसार भी उद्देग, चर,लाभ और अमृत का चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे जिसमें हर प्रकार के शुभ कार्य किये जा सकते हैं अतः इसी समय पर माताएं बहने अपने भाइयों के हाथों पर रक्षा सूत्र वांध सकती हैं

♦️रक्षासूत्र बांधने का मन्त्र!

🏵️पुरुषों को ब्राह्मण से रक्षासूत्र दाहिने हाथ में बंधवाना चाहिए जबकि स्त्रियों को बांये हाथ में । रक्षासूत्र बांधते समय ब्राह्मण को इस मन्त्र को पढ़ना चाहिए—

♦️येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

🏵️आज भी कई घरों में रक्षाबन्धन के दिन ब्राह्मणों से रक्षासूत्र बंधवाने का रिवाज है । इसके बांधने से पूरे वर्ष भर परिवार में पुत्र-पौत्रादि सब सुखी रहते हैं ।

🏵️नंदरानी यशोदा ने अपने लाल श्रीकृष्ण को रक्षासूत्र कैसे बंधवाया, जानें इस पद से–

♦️रक्षा बांधन को दिन आयो |
गर्गादि सब देव बुलाये लालहि तिलक बनायो ।।
सब गुरुजन मिल देत असीस चिरजियो ब्रजरायो ।
बाढै प्रताप नित या ढोटा को परमानंद जस गायो ।।

♦️घर में स्थापित भगवान को कैसे बांधे रक्षासूत्र?

🏵️इस दिन घर पर स्थापित भगवान को भी रोली से टीका कर राखी बांधनी चाहिए और उन्हें मिठाई अर्पित कर धूप-दीप से आरती करनी चाहिए । इसका भाव यह है कि हमने इस रक्षासूत्र को बांधकर अपनी व परिवार की रक्षा का भार प्रभु आपको सौंप दिया है, अब आप जैसा चाहें करें—

🏵️सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में ।
है जीत तुम्हारे हाथों में, है हार तुम्हारे हाथों में ।।

♦️रक्षासूत्र का आधुनिक रूप है राखी
🏵️आजकल रक्षासूत्र का स्थान राखियों ने ले लिया है जिसे रक्षाबन्धन के दिन बहनें भाइयों की कलाई पर बांधती हैं ।

🏵️रक्षाबन्धन का अर्थ है रक्षा का भार जिसका तात्पर्य है कि मुसीबत में भाई बहन का साथ दे या बहन भाई का साथ दे । द्रौपदी ने भगवान कृष्ण को अपनी धोती का चीर (कच्चा धागा) बांधा था और मुसीबत पड़ने पर श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा की । कौरवों की सभा में दु:शासन जब द्रौपदी का चीरहरण कर रहा था तो द्रौपदी लज्जा और भय से पुकार उठी—

♦️गोविन्द द्वारिकावासिन् कृष्ण गोपीजनप्रिय ।
कौरवै: परिभूतां मां किं न जानासि केशव ।।

🏵️तुरन्त ही द्रौपदी की आर्त-पुकार सुनकर श्रीकृष्ण का वस्त्रावतार हो गया । दु:शासन आदि कौरव रजस्वला द्रौपदी की साड़ी खींचते-खींचते हार गये पर उसे भरी सभा में नग्न नहीं कर पाये । इसी प्रकार प्रत्येक भाई को राखी के महत्व को समझना चाहिए ।




♦️रक्षाबन्धन पर क्यों की जाती है श्रवणकुमार की पूजा ?

🏵️इस दिन घरों में मातृ-पितृ भक्त श्रवणकुमार की याद में सोना या सोन रखे जाते हैं फिर उनका रोली-चावल से पूजन कर लड्डू या सिवई या मीठे चावल का भोग लगाया जाता है और उन पर राखी लगाई जाती है । ‘सोन पूजा’ को मनाने का कारण यह है कि जब अज्ञान से राजा दशरथ के बाण से श्रवणकुमार की मृत्यु हो गयी तो राजा दशरथ ने उसके माता-पिता को आश्वासन दिया कि श्रावणी के दिन सभी सनातनी लोग श्रवण पूजा करेंगे। इसीलिए रक्षाबंधन के दिन सर्वप्रथम रक्षासूत्र श्रवणकुमार की याद में ‘सोन’ को अर्पण करते हैं।

🏵️रक्षाबन्धन के पूजन के समय भद्रा नहीं होनी चाहिए।

🏵️इस दिन जिनका यज्ञोपवीत हो गया है, वे पुराना जनेऊ बदलकर नया जनेऊ धारण करते हैं।
🌞प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी व्हाट्सएप नंबर-9756402981,7500048250

धर्म अध्यात्म Tags:Rakshabandhan

Post navigation

Previous Post: Nag Panchami : पृथ्वी पर कैसे हुई नागों की उत्पत्ति, जानें प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित हृदयरंजन शर्मा से
Next Post: Raksha Bandhan-2024 : रक्षा बंधन पर जानिए पौराणिक काल के 10 भाइयों की प्रसिद्ध बहनों के विषय में

Related Posts

  • Hariyali Teej
    Shravan month special : भगवान शिव को अर्पित की जाने वाली हर चीज़ का फल होता है अलग धर्म अध्यात्म
  • नवरात्रि
    Navratri Special : मेडिकल व शिक्षा जगत में चमकता सितारा हैं दोनों बहनें डॉ. मधुलिका शुक्ला और डॉ. दीपिका शुक्ला धर्म अध्यात्म
  • Hariyali Teej
    Shri Hanuman Janmotsav : श्री हनुमान जन्मोत्सव 23 अप्रैल को, जानें मुहूर्त और सावधानियां धर्म अध्यात्म
  • Pancham Skandamata
    Navratri 2023 : मां दुर्गा जी के जानें नौ नाम, रूप और मंत्र धर्म अध्यात्म
  • Durga Ashtami
    Karva Chauth ka pauranik mahatve : मां पार्वती ने सबसे पहले रखा था करवा चौथ का व्रत धर्म अध्यात्म
  • Hartalika Teej 2024 : हरतालिका तीज की व्रत कथा धर्म अध्यात्म

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Durga Navami
    Durga Navami : दुर्गा मां के नवे रूप सिद्धिदात्री या रामनवमी का जानें महत्व धर्म अध्यात्म
  • करवा चौथ का मुहूर्त
    Vishwakarma Puja : विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को है, जानें पूजा का महत्‍व Blog
  • कानपुर सहोदया स्कूल योगा प्रतियोगिता
    कानपुर सहोदया स्कूल योगा प्रतियोगिता में चिंटल्स स्कूल कल्याणपुर व गार्डेनिया पब्लिक स्कूल ने बाजी मारी Sports
  • High Court Lucknow
    High Court Lucknow : सौर ऊर्जा से जगमगाएगा नया हाईकोर्ट परिसर, योगी सरकार ने शुरू की तैयारी UP Government News
  • UP board result
    UP board result : हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट में सीतापुर के परीक्षार्थियों का रहा दबदबा Education
  • पब्लिक चार्जिंग स्टेशन
    बुंदेलखंड, पूर्वांचल, आगरा-लखनऊ और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर बनाए जाएंगे पब्लिक चार्जिंग स्टेशन UP Government News
  • Durga Ashtami
    Phalgun Month : फाल्गुन माह का जानिए क्या है धार्मिक और पौराणिक महत्व धर्म अध्यात्म
  • बिकनी दिवा
    भारत की पहली बिकनी दिवा हैं दिल्ली की खूबसूरत बिंदिया शर्मा मनोरंजन

Copyright © 2026 .

Powered by PressBook News WordPress theme