Skip to content

The Xpress News

  • Home
  • धर्म अध्यात्म
  • Health
  • Blog
  • Toggle search form
  • Hariyali Teej
    Hariyali Teej 2025 : हरियाली तीज 27 को, जानें इस त्योहार में क्या होता है खास धर्म अध्यात्म
  • National Sports Day
    National Sports Day : खेल सप्ताह के तीसरे दिन भी जमकर दिखा उत्साह Sports
  • Ganga Express Way
    Ganga Express Way : उप्र को साल के अंत तक मिलेगी भारत के दूसरे सबसे लंबे एक्सप्रेस-वे की सौगात UP Government News
  • Change of Dress : फुल पैंट शर्ट पहनकर आएंगे परिषदीय विद्यालयों के छात्र Education
  • Navratri 2023
    Sharad Navratri 2023 : शरद नवरात्रि कब से कब तक है ,कौन-कौन से दिन किस देवीमॉ के स्वरूप की पूजा करनी होगी, पढ़ें पूरी जानकारी Blog
  • Travellers Group of India
    Travellers Group of India : फेसबुक समूह ट्रैवलर्स ग्रुप ऑफ इंडिया ने किया अनूठा आयोजन Motivation
  • नियमित एक्सरसाइज से शरीर को बना सकते हैं सुडौल : गरिमा Health
  • डॉ. मधुलिका शुक्ला
    मेरा जीवन संवारने में मां का अहम रोल : डॉ. मधुलिका शुक्ला Health

Relation of Shiva and Shravan : भगवान शिव को आखिर इतना क्यों पसंद है श्रावण मास

Posted on July 10, 2025July 10, 2025 By Manish Srivastava No Comments on Relation of Shiva and Shravan : भगवान शिव को आखिर इतना क्यों पसंद है श्रावण मास

Aligarh : भगवान शिव और श्रावण मास का आपस में बहुत गहरा संबंध (Relation of Shiva and Shravan) है। तो आइए आज आपको इस विषय पर विस्तृत जानकारी दे रहे हैं श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार वाले प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा जी।

सभी बारह महीनों का नाम बारह नक्षत्रों पर अधारित है और जिस तरह बारह राशियां होती है उसी तरह एक साल में बारह महीने भी होते हैं। श्रावण महीने का नाम श्रवण नक्षत्र पर अधारित है। जब भी श्रावण मास या श्रवण नक्षत्र का नाम आता है तब श्रवण कुमार की निःस्वार्थ माता – पिता की भक्ति याद आ जाती है। श्रवण नक्षत्र के स्वामी चन्द्रदेव और देवता भगवान विष्णु जी हैं। जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार में राजा बलि से तीन पग धरती मांगा था उस समय श्रवण नक्षत्र था। सावन या श्रावण साल का पांचवा महीना होता है और कुंडली का पांचवा भाव प्रेम, संतान, पूर्वपुण्य और ईष्ट देवता का होता है।

कहा जाता है कि जब समुद्र मंथन चल रहा था तो उस समय श्रावण मास था और जब मंथन से हलाहल विष निकला और भगवान शिव ने उसे ग्रहण किया तब माता पार्वती ने विष को उनके गले में रोक दिया था जिससे विष उदर तक नहीं पहुंच सका जिससे भगवान शिव नीलकंठ कहलाये लेकिन हलाहल विष गले में रुककर भगवान शिव को पीड़ा देने लगा।

उस पीड़ा से भगवान शिव को बचाने के लिए तीन घटनाये हुई  : 

चन्द्रदेव जो कि समुद्र मंथन से निकले थे वे भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान हुए जिससे भगवान शिव को शीतलता मिले और इसी कारण भगवान शिव को चंद्रशेखर कहा जाता है.

देवताओ ने वर्षा की ताकि भगवान शिव को शीतला मिले इसीलिए सावन मास में भगवान शिव को जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है.

उस समय का भगवान शिव का कोई महान भक्त (शायद रावण) कांवर में गंगाजल लेकर आया और भगवान शिव को चढ़ाया जिससे भगवान शिव हलाहल विष से पीड़ामुक्त हुए.




सावन मास में ही मार्कंडेय ऋषि ने भगवान शिव की तपस्या की थी.

जिस तरह सतयुग में ब्रह्मा जी का, त्रेतायुग में सूर्यदेव का और द्वापर युग में विष्णु भगवान का अधिपत्य या प्रभाव अधिक है उसी तरह कलियुग में गौरीपति भावगन शिव का विशेष महत्व है.

भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता है लेकिन अषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे देवयानी एकादशी कहते हैं से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं जिससे सृष्टि के पालन की जिम्मेदारी भगवान शिव पर आ जाती है। इसलिए भी सावन मास में भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती है। वैसे तो भगवान शिव का निवास स्थान कैलाश पर्वत है लेकिन कलियुग में भगवान शिव पृथ्वी छोड़ किसी अन्य लोक में चले गए लेकिन सावन महीने में वे अपने ससुराल (हिमालयराज के घर) आते हैं और पूरा सावन मास यहीं व्यतीत करते हैं। इसलिए सावन मास में कुँवारे हो या शादीशुदा, स्त्री हो या पुरुष सभी भगवान शिव की उपासना कर प्रेम की कामना करते हैं।

सावन मास में नये व्रतों की शुरुआत करना अच्छा माना जाता है.

सावन मास में सोमवार का दिन हो श्रवण या मघा नक्षत्र हो उस दिन कन्याए सोलह सोमवार के व्रत का संकल्प लेकर सोमवार व्रत की शुरुआत करे तो तो भगवान भोलेनाथ शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं और सुयोग्य एवं मनोवांछित वर का आशीर्वाद देते हैं। भगवान शिव को आक, कनेर, बेला, जूही, धतूरा और चमेली के फूल अति प्रिय है साथ में शमी के पत्ते एवं फूल और दूर्वा भी भगवान शिव को अति प्रिय है।

सबसे अधिक प्रिय है बेलपत्र…..और यदि बेलपत्र पर राम नाम लिख कर शिव जी को चढ़ाया जाय तो भगवान बहुत प्रसन्न होते हैं। भगवान शिव और भगवान विष्णु में अन्तर नहीं करना चाहिए….जो भगवान शिव की पूजा करता है और भगवान विष्णु की निंदा या भगवान विष्णु की पूजा करता है और शिव जी की निंदा उस पर कोई भी प्रसन्न नहीं होता और उसका पतन निश्चित है। सावन का महीना प्रेम और भक्ति का है…..प्रेम से भगवान शिव की आराधना करके प्रेम की कामना करिये।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें…

प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भण्डार वाले पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी व्हाट्सएप नंबर.9756402981,7500048250

धर्म अध्यात्म Tags:Maha Shivratri 2025, Relation of Shiva and Shravan

Post navigation

Previous Post: मकान की नींव में सर्प और कलश आखिर क्यों गाड़े जातें हैं? जानें पं. हृदय रंजन शर्मा जी
Next Post: घर में शिवलिंग स्थापित करने के विषय में सोच रहे हैं तो इन बातों का रखें विशेष ध्यान

Related Posts

  • गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई को : कौन हो सकता है गुरु, जाने pt. हृदयरंज शर्मा जाने से धर्म अध्यात्म
  • ब्रह्मचारिणी
    Dhanteras 2023 : धनतेरस के दिन लक्ष्मी जी के साथ धनवंतरि और कुबेर की भी पूजा की जानी चाहिए धर्म अध्यात्म
  • करवा चौथ
    करवा चौथ के साथ ही त्योहारों की खुशियों का आगाज धर्म अध्यात्म
  • होली
    Guru Nanak Ji Prakash Parv : जानें गुरु नानक देव जी से जुडी कथा और शिक्षायें धर्म अध्यात्म
  • Ashtami Fast
    कूर्म अवतार : इसी दिन भगवान विष्णु ने लिया था कछुए का अवतार, की थी समुद्र मंथन में सहायता धर्म अध्यात्म
  • करवा चौथ का मुहूर्त
    Durga Ashtami -2025 : दुर्गा अष्टमी को होगी माता महागौरी की पूजा, जानें पूजा विधि व मुहूर्त धर्म अध्यात्म

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • शैलपुत्री
    Ahoi Ashtami : इस बार 4 शुभ संयोग के साथ पड़ रही है अहोई अष्टमी धर्म अध्यात्म
  • जय नारायण विद्या मंदिर की बास्केटबॉल टीमें लखनऊ में बनी चैंपियन Sports
  • Kushmanda Devi
    Kushmanda Devi 4 : मां दुर्गा के चौथे स्वरुप का नाम कूष्मांडा है, जानें महिमा धर्म अध्यात्म
  • गणपति बप्पा मोरया
    गणपति बप्पा मोरया की रोचक कथा धर्म अध्यात्म
  • महिला यात्रियों के लिए आलमनगर स्टेशन पर 06 निःशुल्क सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें स्थापित Railway
  • Maha Kumbh-2025
    Maha Kumbh-2025 : अत्याधुनिक उपकरणों से हो रही ‘संगम’ की सुरक्षा और निगरानी Maha Kumbh-2025
  • प्रेक्षा तिवारी ,सुविज्ञा कुशवाहा
    District Table Tennis Championship : प्रेक्षा तिवारी ने तिहरा और सुविज्ञा, तारिणी, आशुतोष, दक्ष  ने जीता दोहरा खिताब Sports
  • योगी आदित्यनाथ
    चौधरी चरण सिंह सच्चे अर्थों में लोकतंत्र के साधक : योगी आदित्यनाथ Blog

Copyright © 2026 .

Powered by PressBook News WordPress theme