Skip to content

The Xpress News

  • Home
  • धर्म अध्यात्म
  • Health
  • Blog
  • Toggle search form
  • North Central Railway Successfully Re-girders the Bridge No. 136 on the Shikohabad-Farrukhabad Rail Section Railway
  • बिधनू बीआरसी में शिक्षक
    दिव्यंगता को ताकत में बदलने का हुनर सीख रहे बिधनू बीआरसी में शिक्षक Blog
  • World winner list
    World winner list : कब-कब किसने जीता वर्ल्ड कप, देखें पूरी लिस्ट Blog
  • Kanpur Badminton
    Kanpur Badminton : राईजिंग प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का खिताब इशिता व विहान ने जीता Blog
  • कानपुर की डॉक्टर मेनका “100 आइकोनिक वूमेन ऑफ इंडिया अवॉर्ड” से सम्मानित Health
  • लोहड़ी पर्व
    Nag Panchami : पृथ्वी पर कैसे हुई नागों की उत्पत्ति, जानें प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित हृदयरंजन शर्मा से धर्म अध्यात्म
  • PM Narendra Modi Bulandshahar Visit
    PM Narendra Modi Bulandshahar Visit : मोदी को चुनावी बिगुल फूंकने की जरूरत नहीं, मोदी विकास का बिगुल फूंकता है : प्रधानमंत्री Politics
  • डॉ. मधुलिका शुक्ला
    मेरा जीवन संवारने में मां का अहम रोल : डॉ. मधुलिका शुक्ला Health
शैलपुत्री

मकान की नींव में सर्प और कलश आखिर क्यों गाड़े जातें हैं? जानें पं. हृदय रंजन शर्मा जी

Posted on July 10, 2025July 10, 2025 By Manish Srivastava No Comments on मकान की नींव में सर्प और कलश आखिर क्यों गाड़े जातें हैं? जानें पं. हृदय रंजन शर्मा जी

Aligarh : मकान की नींव में सर्प और कलश क्यों गाड़ा जाता है ? तो आइए आज आपको इस विषय पर विस्तृत जानकारी दे रहे हैं श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भण्डार वाले प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पं.हृदय रंजन शर्मा जी।

श्रीमद्भागवत महापुराण के पांचवें स्कंद में लिखा है कि पृथ्वी के नीचे पाताल लोक है और इसके स्वामी शेषनाग हैं। भूमि से दस हजार योजन नीचे अतल, अतल से दस हजार योजन नीचे वितल, उससे दस हजार योजन नीचे सतल, इसी क्रम से सब लोक स्थित हैं। अतल, वितल, सतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल ये सातों लोक पाताल स्वर्ग कहलाते हैं। इनमें भी काम, भोग, ऐश्वर्य, आनन्द, विभूति ये वर्तमान हैं। दैत्य, दानव, नाग ये सब वहां आनन्द पूर्वक भोग-विलास करते हुए रहते हैं। इन सब पातालों में अनेक पुरियां प्रकाशमान रहती हैं। इनमें देवलोक की शोभा से भी अधिक बाटिका और उपवन हैं। इन पातालों में सूर्य आदि ग्रहों के न होने से दिन-रात्रि का विभाग नहीं है। इस कारण काल का भय नहीं रहता है। यहां बड़े-बड़े नागों के सिर की मणियां अंधकार दूर करती रहती हैं। पाताल में ही नाग लोक के पति वासुकी




आदि नाग रहते हैं। श्री शुकदेव के मतानुसार पाताल से तीस हजार योजन दूर शेषजी विराजमान हैं। शेषजी के सिर पर पृथ्वी रखी है। जब ये शेष प्रलय काल में जगत के संहार की इच्छा करते हैं, तो क्रोध से कुटिल भृकुटियों के मध्य तीन नेत्रों से युक्त 11 रुद्र त्रिशूल लिए प्रकट होते हैं। पौराणिक ग्रंथों में शेषनाग के फण (मस्तिष्क) पर पृथ्वी टिकी होने का उल्लेख मिलता है।

शेष चाकल्पयद्देवमनन्तं विश्वरूपिणम् । यो धारयति भूतानि धरां चेमां सपर्वताम् ॥
-महाभारत/भीष्मपर्व 67/13

अर्थात् इन परमदेव ने विश्वरूप अनंत नामक देवस्वरूप शेषनाग को उत्पन्न किया, जो पर्वतों सहित इस सारी पृथ्वी को तथा भूतमात्र को धारण किए हुए है।

उल्लेखनीय है कि हजार फणों वाले शेषनाग समस्त नागों के राजा हैं। भगवान् की शव्या बनकर सुख पहुंचाने वाले, उनके अनन्य भक्त हैं और बहुत बार भगवान् के साथ-साथ अवतार लेकर उनकी लीला में सम्मिलित भी रहते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता के 10वें अध्याय के 29वें श्लोक में भगवान् कृष्ण ने कहा है-अनन्तश्चास्मि नागानाम्’ अर्थात् मैं नागों में शेषनाग हूं।

नींव पूजन का पूरा कर्मकांड इस मनोवैज्ञानिक विश्वास पर आधारित है कि जैसे शेषनाग अपने फण पर संपूर्ण पृथ्वी को धारण किए हुए है, ठीक उसी प्रकार मेरे इस भवन की नींव भी प्रतिष्ठित किए हुए चांदी के नाग के फण पर पूर्ण मजबूती के साथ स्थापित रहे । शेषनाग क्षीरसागर में रहते हैं, इसलिए पूजन के कलश में दूध, दही, घी डालकर मंत्रों से आह्वान कर शेषनाग को बुलाया जाता है, ताकि वे साक्षात् उपस्थित होकर भवन की रक्षा का भार वहन करें। विष्णुरूपी कलश में लक्ष्मी स्वरूप सिक्का डालकर पुष्प व दूध पूजन में अर्पित किया जाता है, जो नागों को अतिप्रिय है। भगवान् शिवजी के आभूषण तो नाग है ही। लक्ष्मण और बलराम शेषावतार माने जाते हैं। इसी विश्वास से यह प्रथा जारी है।*




अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें ….
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पं.हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भंडार पुरानी कोतवाली सराफा बाजार अलीगढ़ यूपी. व्हाट्सएप नंबर.9756402981,7500048250

धर्म अध्यात्म Tags:पं. हृदय रंजन शर्मा, मकान की नींव में सर्प गाड़ने का रहस्य

Post navigation

Previous Post: Jijamata felicitation ceremony : कुलदीप यादव, कोच कपिल पांडे व कुश चतुर्वेदी की माता को किया आमंत्रित
Next Post: Relation of Shiva and Shravan : भगवान शिव को आखिर इतना क्यों पसंद है श्रावण मास

Related Posts

  • शैलपुत्री
    फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा दिन सोमवार 2 मार्च को धर्म अध्यात्म
  • हरतालिका तीज व्रत (गौरी तृतीया व्रत) 26 अगस्त 2025 दिन मंगलवार को है, जानें चमत्कारी उपाय धर्म अध्यात्म
  • Shri Krishna Janmashtami
    Shri Krishna Janmashtami : ग्वाल वालों ने मिलकर फोड़ी मटकी धर्म अध्यात्म
  • Kharmas
    Rakshabandhan :रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र बांधने का जानें सर्वोत्तम मुहूर्त Blog
  • Ahoi Ashtami 2023 : अहोई अष्टमी व्रत से संतान की होती है लम्बी आयु, पढ़ें संपूर्ण जानकारी धर्म अध्यात्म
  • होली
    Shardiya Navratri 2023 : नवरात्रि में स्थापना के साथ वोने वाले जौ विषय में जानें धर्म अध्यात्म

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Surya Namaskar Mahayagya
    Surya Namaskar Mahayagya : क्रीड़ा भारती ने सूर्य नमस्कार सप्ताह का किया भव्य शुभारंभ, देखें Vidieo Sports
  • डॉक्टर मधुलिका
    होम्योपैथिक दवा से साइटिका की बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है : डॉ. मधुलिका शुक्ला Health
  • होली
    Makar Sankranti-2024 : आखिर हम क्यों मनाते हैं मकर संक्रांति, जानें पंडित हृदय रंजन शर्मा से धर्म अध्यात्म
  • Argentina World Cup : सिफत ने दिलाया अर्जेंटीना विश्व कप में भारत को पहला स्वर्ण Sports
  • आईएमए कानपुर के डॉक्टरों को चम्पतराय ने समझाया जन्मभूमि विवाद का इतिहास, देखें वीडियो धर्म अध्यात्म
  • स्टैग-टीएसएच 4th यूपी स्टेट रैंकिंग टेबल टेनिस टूर्नामेंट का पुरस्कार एवं सम्मान समारोह सम्पन्न Sports
  • Ayodhya
    Ayodhya : पीएम मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया नव्य अयोध्या धाम Blog
  • Kannauj Railway Station
    कन्नौज रेलवे स्टेशन आधुनिक सुख-सुविधाओं से युक्त किया जायेगा Blog

Copyright © 2026 .

Powered by PressBook News WordPress theme