- Navratri Special
- अपने टैलेंट और अनुभव से आम जनता की लगातार निस्वार्थ सेवा से समाजसेवा कर प्रस्तुत किया नारी सशक्तिकरण का नायाब उदाहरण
- अद्भुत इलाज के लिए डॉक्टर मधुलिका शुक्ला व शिक्षा में अहम योगदान के लिए प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला को मिला है अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार

कानपुर : अपने शहर कानपुर की दो बहनों ने अपने अनुभव, कार्य और अद्भुत व्यवहार के साथ निस्वार्थ सेवा भाव से आम जनता की सेवा कर नारी सशक्तिकरण का नायाब उदाहर प्रस्तुत किया है। लगातार सफलता के नए आयाम लिख रहीं कानपुर की मशहूर सीनियर होम्योपैथिक फिजीशियन डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने अद्भुत इलाज कर अब तक राज्य व राष्ट्रीय पुरस्कारों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी अपने नाम किया है।
होम्योपैथिक के क्षेत्र में अद्भुत इलाज करने के लिए डॉक्टर मधुलिका शुक्ला को प्रसिद्ध हृदय शल्य चिकित्सक और मेदांता – द मेडिसिटी के संस्थापक, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. नरेश त्रेहन ने हाल ही में थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय डॉक्टर्स अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया था। वहीं दूसरी ओर उनकी बहन व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला को भी इस इवेंट में अंतरराष्ट्रीय अवार्ड दिया गया।
प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला महाराणा प्रताप डेंटल कालेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। अपनी जानकारी, अनुभव और पढ़ाने के अद्भुत तरीकों से शिक्षा जगत में लगातार वह अपना नाम रौशन कर रहीं है। अंतरराष्ट्रीय सहित कई पुरस्कार जीतने वाली डॉक्टर मधुलिका शुक्ला और प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता और भाई को दिया।
विशेष बातचीत में डॉक्टर मधुलिका शुक्ला ने बताया कि शुरुआती दिनों मैंने बहुत संघर्ष किया था। जब मैं अपना कॅरियर बनाने के लिए संघर्ष कर रही थी तब मेरे पिता ने महत्वपूर्ण सलाह देते हुए कहा था कि कभी तुम हार नहीं मानना। आज उनकी महत्वपूर्ण सलाह के साथ दिन और रात कड़ी मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि मुझे आज इतनी बड़ी उपलब्धि मिली है।
वहीं प्रोफेसर डॉ. दीपिका शुक्ला ने शिक्षा जगत में अपनी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मैंने हमेशा यही प्रयास है कि छात्रों को अधिक से अधिक शिक्षा आसानी से उपलब्ध हो सके। मेरे जीवन का यही उद्देश्य है कि हर जरूरतमंद छात्र को उचित शिक्षा हासिल करने का अवसर मिल सके।

कानपुर के साथ ही आसपास जिलों में मशहूर होने के बाद अब देश ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकीं डॉक्टर मधुलिका ने कहा कि मेरे जीवन का उद्देश्य यही है कि कोई भी मरीज बिना इलाज व दवा के परेशान नहीं होने पाए। मैंने निस्वार्थ भाव से ही सबकी दिन और रात सेवा कर मरीजों की बीमारियों को ठीक किया है। स्वस्थ होने वाले मरीजों और उनके परिवार वालों की शुभकामनाओं, दुआओं और आशीर्वाद का ही नतीजा है कि आज मुझे इतनी बड़ी खुशी मिली है कि मन में नहीं समा रही है। मैंने हमेशा होम्योपैथिक इलाज और दवा का प्रचार-प्रसार किया है। मैंने हमेशा लोगों के भ्रम को दूर किया है कि होम्योपैथिक दवाओं से इलाज कराने में बहुत समय लगता है। होम्योपैथिक दवा से कोई भी बीमारी का जड़ से इलाज होता है और जीवन में कभी भी लौट कर नहीं आता है।
