- उत्सुकता से सबने सुनी सूक्ष्म कानूनी पहलुओं की गाथा
अयोध्या, 12 अप्रैल। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) कानपुर के 50 सदस्यीय डॉक्टरों के दल
ने रामजन्मभूमि का भ्रमण कर प्रभु राम के दर्शन किए। यहां श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चम्पत राय ने जन्मभूमि विवाद का इतिहास बताया। उन्होंने कहा कि अयोध्या अति प्राचीन नगर होने के साथ मोक्षदायिनी भी है। राम से जुड़ाव के अलावा बहुत कम लोग ही जानते हैं कि यह नगर अधिकांश हिन्दू परंपराओं के प्रणेताओं का केंद्र रहा है।

होटल क्रिनॉस्कों के सभागार में डॉक्टरों को दल को चम्पत राय ने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि का वास्तविक विवाद क्या था। समाज के अप्रचारित सूक्ष्म तथ्यों को जान डॉक्टरों का दल कौतूहल भरी जिज्ञासा से शांतचित्त हो एक-एक शब्द सुनता रहा। महासचिव ने कहा कि यह सामान्य 1450 वर्ग मीटर भूमि के टुकड़े का विवाद नहीं था। यह हमारे स्वाभिमान और गौरव की लड़ाई थी। 1935 तक हुए संघर्षों के बाद 1949 से न्यायालय में कानूनी प्रक्रिया की लड़ाई छिड़ गई। हिन्दू समाज का कहना था कि एक विदेशी आक्रांता के कहने पर हमारे स्वाभिमान को चोट पहुंचाने के लिए मंदिर जन्म स्थान ध्वस्त कर तीन गुंबदों का ढांचा खड़ा किया गया।
मुस्लिम पक्ष का दावा था कि बाबर ने अपनी सेना को नमाज पढ़ने के लिए बंजर भूमि पर तीन गुंबदों वाली मस्जिद का निर्माण कराया। न्यायालय ने यही तलाशा कि 1528 में वहां कुछ था या नहीं। वहीं से हिन्दू समाज की जीत का मार्ग प्रशस्त हुआ क्योंकि हम सही थे। उन्होंने बताया कि यहां अधिकांश मंदिर राम के हैं। अन्य परंपराओं में गुरुनानक देव, गौतम बुद्ध, जैन परंपरा के तीर्थंकरों की यह धरती है। लगभग सवा घंटे के व्याख्यान में डॉक्टरों का दल हतप्रभ हो नई जानकारियां मानस पटल पर संजोता रहा। बीती सायंकाल इसके पूर्व डॉक्टरों के दल ने श्रीराम जन्मभूमि सहित हनुमानगढ़ी, दशरथ महल, कनक भवन आदि मंदिरों के दर्शन किए व मां सरयू की आरती में शामिल हुआ। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. वीसी रस्तोगी ने किया।

मुख्य रूप से डॉ. एके श्रीवास्तव, डॉ. वीएस शर्मा, डॉ. संजीव कक्कड़, डॉ. ओपी पाठक, डॉ. श्रुति भूटानी, डॉ. आलोक गहलौत, डॉ. एके गुप्ता, डॉ. सुशांत लूथरा, डॉ. विशाल सिंह, डॉ. कुणाल सहाय, आदि मौजूद रहे। आईएमए अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने महासचिव का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन आईएमए सचिव डॉ. शालिनी मोहन ने किया।

