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Flag-Hoisting Ceremony at the Shiva Temple

Flag-Hoisting Ceremony at the Shiva Temple : हमारे महापुरुषों को जातीय आधार पर बांटने वाले महापापी : योगी आदित्यनाथ

Posted on April 30, 2026April 30, 2026 By Manish Srivastava No Comments on Flag-Hoisting Ceremony at the Shiva Temple : हमारे महापुरुषों को जातीय आधार पर बांटने वाले महापापी : योगी आदित्यनाथ
  • शिव मंदिर पर मुख्यमंत्री ने किया ध्वजारोहण (Flag-Hoisting Ceremony at the Shiva Temple)
  • राम की तरह समाज को एक सूत्र में पिरोने पर ही हम सुरक्षित
  • राम मंदिर आन्दोलन का ताप आज भी है समाज में

अयोध्या 29 अप्रैल| जन्मभूमि मंदिर के परकोटे पर बने छह मंदिरों में से एक भगवान शिव के मंदिर के शिखर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज सायं 5:45 बजे विधि विधान से पूजन के साथ ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर उन्होंने सनातन धर्म की एकता पर बल देते हुए कहा कि भारत की एकता को मजबूत बनाने में अपना योगदान दीजिए। हमारे देवताओं ने समाज को एक सूत्र में बांधा। जिसे समाजवाद के नेता डॉ लोहिया ने खुल कर स्वीकारा। आज उन्हीं के तथाकथित अनुयायी महापुरुषों को बांटने का काम कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डॉ लोहिया ने स्वीकार किया कि जब तक राम, कृष्ण और शिव के संदेश देश में रहेंगे कोई हमें विभाजित नहीं कर सकता है। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि आज उन्हीं के समर्थक हमारे महापुरुषों को भी बांटने का काम कर रहे हैं। उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि अपनी विरासत को इसी मजबूती के साथ आगे बढ़ाने के लिए कृत संकल्पित होकर आगे बढ़िए। जिन लोगों ने अपने महापुरुषों को जातीयता के आधार पर देश को बांटने, समाज की एकता को खंडित करने का पाप किया वे सब राम मंदिर के वैभव को देख रहे हैं। आप लोग यह पाप कभी मत होने देना। आज जिस गौरव की अनुभूति हम सब कर रहे हैं उस गौरव को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस दिन देश का 140 करोड़ भारतवासी अपने नेतृत्व पर विश्वास मजबूत करते हुए आगे बढ़ेगा, उस दिन दुनिया की कोई ताकत उसके सामने पनप नहीं सकती है। नए भारत को इसी दिशा में आगे बढ़ाने का हम सब का संकल्प होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन पूरे विश्व में अपने तरह का अनूठा आंदोलन रहा। गरीब से अमीर तक सभी अपने राम का भव्य मंदिर चाहते थे। 1528 ईस्वी से अब तक सभी सनातन धर्मावलम्बी लगातार संघर्ष करते रहे। अशोक सिंघल जी द्वारा आंदोलन हाथ में लेते ही जो ताप आया वह आज भी देश के विभिन्न हिस्सों में महसूस होता है। राम त्रेता से भारत को जोड़ रहे हैं, वही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।




उन्होंने कहा कि हम सब साक्षी हैं उन तिथियों की जब माननीय उच्चतम न्यायालय ने श्रीराम जन्मभूमि का फैसला दिया। पूरा भारत झूम उठा था। जो लोग इसके विरोध में बोलते थे, वकील खड़े करते थे, ये वही लोग हैं जो रामसेतु को तोड़ना चाहते थे। ये वही लोग हैं जिन्होंने प्रयास किया कि समस्या का समाधान न निकले और भारत का सनातन धर्मावलंबी अपने को अपमानित महसूस करता रहे। लेकिन जब माननीय उच्चतम न्यायालय ने देश के हित में सनातन धर्म की भावनाओं के अनुरूप उपलब्ध साक्ष्यों व प्रमाणों के आधार पर फैसला दिया तो देश ही नहीं पूरी दुनिया ने उसका स्वागत किया। मैं कह सकता हूं कि भारत के इतिहास का वह सबसे शांत दिन था, सबसे खुशहाल दिनों में से एक दिन था। जिस दिन निर्णय आया कहीं कोई हलचल नहीं हुई।

जब प्रधानमंत्री जी ने अपने कर कमल से 5 अगस्त 2020 को भव्य श्रीराम मंदिर का भूमि पूजन किया तो लोगों को लगता था क्या राम मंदिर बन जाएगा। हम सब साक्षी हैं 5 अगस्त 2020 के दुनिया कोविड से परेशान थी, परन्तु अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के पूजन का कार्यक्रम इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया। हम सब श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा के साक्षी बने जब 22 जनवरी 2024 को देश के यशस्वी प्रधानमंत्री ने यह भव्य मंदिर देश को समर्पित किया। अगले दिन 5 लाख लोगों ने अयोध्या दर्शन किए पूरा देश प्रसन्न था। यह दुनिया में एक मिसाल थी।

इतना बड़ा आंदोलन और अंततः विजय यह अयोध्या में ही संभव है। इससे संदेश गया कि हम झुकेंगे नहीं, रुकेंगे नहीं, अपने लक्ष्य को प्राप्त करेंगे। यह अयोध्या ने दुनिया को बताया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी सनातन धर्मावलंबी बोल उठे थे तब राम जन्मभूमि में मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो पाया। हमारे विभाजन का हमेशा से लाभ उठाया गया। हम आज एकजुट होकर जब उसका मुकाबला कर रहे हैं तो सुरक्षित है। हर व्यक्ति सुरक्षित है। अपनी विरासत को गौरव के साथ आगे बढ़ते हुए आने वाली पीढ़ी को गौरव के साथ बताने की स्थिति में हैं। यह गैरवमयी क्षण हमने अपनी आंखों से देखा है। हमें अपने पूर्व जन्म का पुण्य प्राप्त हो रहा है। हमने इसके महत्व को भी समझा है और इसको वर्तमान और भावी पीढ़ी को बताएं।

हमें भगवान राम का सान्निध्य प्राप्त हो रहा है और इससे बड़ी कृपा दूसरी नहीं हो सकती है। इसके पूर्व मुख्यमंत्री ने हनुमानगढ़ी में दर्शन पूजन के बाद रामलला व प्रथम तल पर रामदरबार का दर्शन पूजन कर शिव मंदिर में अभिषेक किया। मंच पर ध्वज पूजन किया। इस दौरान आचार्य इंद्रदेव मिश्र, पुष्पदीप ने वेद मंत्रोचार के साथ ध्वज पूजन कराया। साथ में वेदपाठी गोपाल पाण्डेय, त्रिपुरारी त्रिपाठी, शिवा दीक्षित, उत्कर्ष पाण्डेय, मृदुल तिवारी ने ध्वज आरोहण के समय राष्ट्र सूक्त पाठ किया।

श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर के परकोटे में ईशान कोण (उत्तर -पूर्व) पर स्थित शिव मन्दिर का ध्वजदंड 19 फिट सात इंच ऊंचा है। ध्वज की लंबाई (लहर) नौ फिट तीन इंच और चौड़ाई (लपेट) चार फिट सात इंच है।

इसके पूर्व श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चम्पतराय ने मंदिर निर्माण प्रक्रिया को सूक्ष्मता से बताया और कहा निर्माण विधि ऐसी है कि मंदिर एक हजार वर्ष से अधिक की आयु प्राप्त करे। उन्होंने सम्पूर्ण जन्मभूमि मंदिर को सामाजिक समरसता का उच्चतम प्रमाण बताया और कहा राम ने जिनसे आशीष लिया, जिनको गले लगाया व जिनसे मित्रता की,सभी का मंदिर बनाया गया है। चारों और राम से सम्बद्ध भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के काँस्य धातु की भित्तिप्रतिमाएं (म्यूरल्स) लगाए गए हैं, राम कथा पर आधारित भित्तिचित्र भी उकेरे गए हैं।उन्होंने बताया कि राम मंदिर के न्यायिक संघर्ष को डिजिटली सुरक्षित किया गया है, निर्माण की तकनीक इंजीनियरिंग के छात्र पढ़ सकें, इस के लिए पुस्तक बनाई गई है।

मुख्यमंत्री के साथ मंच पर महासचिव के अलावा न्यासी डॉ अनिल मिश्र, निर्मोही अखड़ा के महंत स्वामी दिनेन्द्र दास, न्यासी कृष्णमोहन, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी भी उपस्थित रहे| इसके अलावा गोपाल नागरकट्टे, महानगर संघ चालक विक्रमा प्रसाद पाण्डेय, विधायक वेद गुप्ता, मेयर गिरीश पति त्रिपाठी, जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह, रामशंकर यादव उर्फ़ टिन्नू, नरेन्द्र, डॉ चंद्र गोपाल पाण्डेय, कैप्टन केके तिवारी, भोलेन्द्र, प्रेम प्रकाश मिश्र, प्रद्युम्न आदि इस अवसर पर उपस्थित थेl

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